मध्य प्रदेश की पावन और मोक्षदायिनी नगरी ‘उज्जैन’ (प्राचीन अवंतिका) को मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहाँ कण-कण में भगवान शिव और विभिन्न देवी-देवताओं का वास है। सनातन धर्म की यह स्थापित मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या तीर्थ यात्रा का आरंभ ‘प्रथम पूज्य’ विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना के बिना पूर्ण नहीं होता। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए, उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शनों से पूर्व या तुरंत बाद, श्रद्धालु जिस सबसे प्रमुख और चमत्कारी मंदिर के दर्शन करते हैं, वह है—श्री बड़े गणेश जी का मंदिर (Bade Ganeshji Ka Mandir)।
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बिल्कुल समीप स्थित यह मंदिर उज्जैन के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस मंदिर में भगवान गणेश की अत्यंत विशाल (विराट्) और मनमोहक प्रतिमा स्थापित है। लेकिन इस मंदिर और यहाँ विराजमान प्रतिमा की ख्याति केवल इसके विशाल आकार के कारण नहीं है, बल्कि इस मूर्ति के निर्माण में प्रयुक्त की गई अद्भुत और अलौकिक निर्माण सामग्री (Building Materials) के कारण है, जो इसे पूरे विश्व में अद्वितीय बनाती है।
वर्ष 2026 में, जब उज्जैन ‘श्री महाकाल महालोक’ के कारण वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, बड़े गणेश मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है।
इस अत्यंत विस्तृत, शोधपूर्ण और संपूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) में हम ‘बड़े गणेश जी का मंदिर’ के ऐतिहासिक निर्माण, महर्षि नारायणजी गुरु के संकल्प, सप्त पुरियों की मिट्टी से मूर्ति निर्माण के रहस्य, मंदिर में स्थित पंचमुखी हनुमान और ज्योतिष विद्या के केंद्र, दर्शन व आरती के समय, और आपकी उज्जैन यात्रा को सुगम बनाने वाली हर आवश्यक जानकारी पर गहराई से चर्चा करेंगे।
1. श्री बड़े गणेश जी का मंदिर: परिकल्पना और उद्देश्य
उज्जैन का बड़े गणेश मंदिर केवल एक ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं है; यह भारत की राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक अखंडता और आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत प्रतीक है।
बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और देश में स्वतंत्रता संग्राम की लहर उठ रही थी, तब समाज को एक सूत्र में पिरोने और सनातन धर्म के प्रति जागरूकता जगाने के लिए कई आध्यात्मिक प्रयास किए गए। इसी कालखंड में उज्जैन के एक महान संत, ज्योतिषाचार्य और स्वतंत्रता प्रेमी महर्षि नारायणजी गुरु (Maharshi Narayanji Guru) ने एक ऐसे मंदिर की परिकल्पना की, जो संपूर्ण भारतवर्ष की पवित्रता को एक ही स्थान पर समेट सके।
महर्षि नारायणजी का उद्देश्य केवल एक विशाल मूर्ति बनाना नहीं था, बल्कि वे भगवान गणेश के रूप में एक ऐसे ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ की स्थापना करना चाहते थे, जहाँ आकर भक्त को पूरे भारतवर्ष के प्रमुख तीर्थों की पवित्रता का अहसास हो। इसी महान उद्देश्य के साथ इस मंदिर और इसकी चमत्कारी प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू किया गया।
2. मूर्ति के निर्माण का अद्भुत रहस्य: सप्त पुरियों की मिट्टी
बड़े गणेश मंदिर की प्रतिमा दुनिया की किसी भी अन्य साधारण पत्थर, संगमरमर या धातु की प्रतिमा से बिल्कुल अलग है। इस मूर्ति का निर्माण पारंपरिक भारतीय वास्तुकला, आयुर्वेद और तंत्र शास्त्र के अद्भुत मिश्रण से किया गया है।
निर्माण सामग्री (The Unique Ingredients)
महर्षि नारायणजी गुरु ने इस 18 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण के लिए पूरे भारतवर्ष की सबसे पवित्र नदियों और तीर्थों की सामग्री का उपयोग किया। इस प्रतिमा को बनाने में निम्नलिखित चीजों का मिश्रण तैयार किया गया:
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सप्त पुरियों की मिट्टी (Soil from Seven Holy Cities): हिंदू धर्म में मोक्ष प्रदान करने वाली सात पवित्र पुरियां मानी गई हैं—अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी (वाराणसी), कांची, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका। महर्षि नारायणजी ने इन सातों पवित्र नगरों से मिट्टी मंगवाई और उसे इस मूर्ति के निर्माण में शामिल किया।
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पवित्र नदियों का जल (Water from Holy Rivers): मूर्ति का लेप तैयार करने के लिए गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी और क्षिप्रा नदियों के पवित्र जल का उपयोग किया गया।
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आयुर्वेदिक और प्राकृतिक वस्तुएं: प्राचीन भारतीय मूर्ति निर्माण कला (Shilpa Shastra) का पालन करते हुए, मिट्टी और चूने को बांधने के लिए किसी रासायनिक सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया। इसके बजाय, गुड़ (Jaggery), मेथी दाना (Fenugreek seeds), ईंट का चूरा, बालू रेत और कत्थे के लेप का प्रयोग किया गया। यह प्राकृतिक लेप मूर्ति को हजारों वर्षों तक सुरक्षित और जीवंत बनाए रखता है।
चूंकि इस मूर्ति में भारत के सभी प्रमुख तीर्थों की मिट्टी और नदियों का जल समाहित है, इसलिए यह माना जाता है कि बड़े गणेश जी के दर्शन मात्र से व्यक्ति को सप्त पुरियों की यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान करने के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।
3. मूर्ति और मंदिर की वास्तुकला (Architecture and Dimensions)
बड़े गणेश मंदिर का गर्भगृह और प्रतिमा की भव्यता किसी भी श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध करने के लिए पर्याप्त है।
प्रतिमा का आकार और स्वरूप
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ऊंचाई और चौड़ाई: भगवान गणेश की यह प्रतिमा लगभग 18 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी है। यह मध्य भारत की सबसे विशाल गणेश प्रतिमाओं में से एक है।
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स्वरूप: प्रतिमा में भगवान गणेश एक ऊंचे आसन पर विराजमान हैं। उनका उदर (पेट) अत्यंत विशाल है, जो इस बात का प्रतीक है कि वे पूरे ब्रह्मांड को अपने भीतर समाए हुए हैं और भक्तों की हर अच्छी-बुरी बात को पचाने की क्षमता रखते हैं।
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रंग और श्रृंगार: प्रतिमा को अत्यंत मनमोहक सिंदूरी (Orange-Red) रंग से रंगा गया है। भगवान गणेश के मस्तक पर सुंदर मुकुट, कानों में विशाल कुंडल और सूंड पर बारीक नक्काशीदार आभूषण सुशोभित हैं। उनके हाथों में अंकुश, पाश, मोदक और आशीर्वाद की मुद्रा है।
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रिद्धि और सिद्धि: भगवान गणेश के दोनों ओर उनकी पत्नियां, माता रिद्धि (समृद्धि की देवी) और माता सिद्धि (सफलता की देवी) विराजमान हैं।
मंदिर का प्रवेश द्वार और प्रांगण
मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही पारंपरिक और सुंदर है। अंदर प्रवेश करते ही एक खुला आंगन आता है, जहाँ से मुख्य गर्भगृह के सीधे दर्शन होते हैं। महाकाल मंदिर के ठीक पास होने के बावजूद, इस मंदिर के अंदर एक अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास है।
4. मंदिर परिसर में स्थित अन्य प्रमुख देवता (Other Deities in the Complex)
बड़े गणेश मंदिर परिसर केवल विघ्नहर्ता गणेश तक ही सीमित नहीं है; यहाँ कई अन्य महत्वपूर्ण और जाग्रत देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस स्थान के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देती हैं।
पंचमुखी हनुमान जी (Panchmukhi Hanuman)
मंदिर के प्रांगण में भगवान हनुमान का एक अत्यंत दुर्लभ ‘पंचमुखी’ (Five-faced) स्वरूप विराजमान है।
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स्वरूप: इस प्रतिमा में भगवान हनुमान के पांच मुख हैं—वानर (स्वयं हनुमान), नृसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव।
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ज्योतिषीय महत्व: पंचमुखी हनुमान जी को तंत्र-मंत्र, बुरी नजर, ऊपरी हवा और शनि के दोषों को दूर करने वाला माना जाता है। उज्जैन के स्थानीय लोग किसी भी नए कार्य की शुरुआत या संकट के समय इन पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन अवश्य करते हैं।
नवग्रह मंदिर (Navagraha Temple)
परिसर के एक हिस्से में नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) का भी एक सुंदर मंदिर स्थापित है। जो श्रद्धालु अपनी जन्म कुंडली के ग्रह दोषों को शांत करना चाहते हैं, वे यहाँ आकर नवग्रहों की परिक्रमा और पूजा करते हैं।
माता यशोदा और कृष्ण
मंदिर के एक विशेष भाग में माता यशोदा की गोद में बैठे बाल कृष्ण की एक अत्यंत मनमोहक धातु की प्रतिमा भी स्थापित है, जो वात्सल्य और प्रेम का प्रतीक है।
5. ज्योतिष और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र (Center for Astrology and Education)
उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर की एक और सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान, ज्योतिष शास्त्र और संस्कृत भाषा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र (Vidyapeeth) भी है।
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महर्षि नारायणजी की विरासत: मंदिर के संस्थापक महर्षि नारायणजी गुरु स्वयं एक प्रकांड ज्योतिषी और संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने मंदिर परिसर में ही एक गुरुकुल की स्थापना की थी।
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ज्योतिष का अध्ययन (Astrology Center): आज भी यह मंदिर उज्जैन में ज्योतिषीय गणना, पंचांग निर्माण और हस्तरेखा विज्ञान (Palmistry) का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ देश भर से विद्यार्थी ज्योतिष शास्त्र की बारीकियां सीखने आते हैं।
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सटीक पंचांग: इस मंदिर के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा तैयार किया गया पंचांग (Hindu Almanac) पूरे मध्य प्रदेश और भारत के कई हिस्सों में अत्यंत प्रामाणिक माना जाता है। यहाँ जन्म कुंडली निर्माण, ग्रह शांति और विवाह मुहूर्त आदि की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
6. मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख उत्सव (Major Festivals Celebrated)
बड़े गणेश मंदिर में वर्ष भर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर यहाँ का नजारा किसी महा-उत्सव से कम नहीं होता:
1. गणेश चतुर्थी (Ganeshotsav)
भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) से लेकर अनंत चतुर्दशी तक (10 दिनों तक) यह मंदिर उज्जैन के सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र होता है।
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इन दस दिनों में भगवान गणेश का प्रतिदिन अलग-अलग और भव्य श्रृंगार (जैसे राजा, ब्राह्मण, साधु स्वरूप) किया जाता है।
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भगवान को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाता है।
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पूरे मंदिर को सुगंधित फूलों, रंगोली और विद्युत रोशनी से सजाया जाता है, और प्रतिदिन शाम को भजन संध्या का आयोजन होता है।
2. तिल चतुर्थी (सकट चौथ)
माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘तिल चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है। सर्दियों के इस मौसम में भगवान गणेश को विशेष रूप से तिल और गुड़ से बने विशाल लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दर्शन करने से संतान की आयु लंबी होती है और परिवार पर कोई संकट नहीं आता।
3. अन्नकूट और दीपावली
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर यहाँ ‘अन्नकूट’ का आयोजन होता है। भगवान गणेश को छप्पन भोग (56 प्रकार के व्यंजन) अर्पित किए जाते हैं, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
7. दर्शन और आरती का समय (Darshan and Aarti Timings)
यदि आप 2026 में उज्जैन की यात्रा कर रहे हैं, तो बड़े गणेश मंदिर के दर्शन और आरती का समय अवश्य जान लें। यह मंदिर श्री महाकालेश्वर मंदिर के वीआईपी (VIP) गेट के बिल्कुल करीब है, इसलिए दर्शन करना बहुत सुविधाजनक है।
मंदिर खुलने और बंद होने का समय:
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प्रातः काल (Morning): सुबह 05:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
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दोपहर का विश्राम: दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक मंदिर के कपाट भगवान के विश्राम के लिए बंद रहते हैं।
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संध्या काल (Evening): शाम 04:00 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक।
प्रतिदिन आरती की समय सारणी (Aarti Schedule)
| आरती का नाम | समय (Aarti Timings) | महत्व (Significance) |
| मंगला आरती | सुबह 05:30 से 06:00 बजे | भगवान को जगाने और पंचामृत स्नान के पश्चात की आरती। |
| राजभोग आरती | दोपहर 11:30 बजे | भगवान को मुख्य नैवेद्य (भोजन) अर्पित करने की आरती। |
| संध्या आरती | शाम 07:00 से 07:30 बजे | सूर्यास्त के समय होने वाली आरती (यह आरती सबसे मनमोहक होती है)। |
| शयन आरती | रात 08:00 से 08:30 बजे | भगवान के विश्राम से पूर्व की अंतिम आरती। |
(सुझाव: यदि आप महाकाल मंदिर की भस्म आरती या सुबह के दर्शन करके बाहर निकलते हैं, तो तुरंत बाद सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच बड़े गणेश मंदिर के दर्शन करना सबसे उत्तम रहता है। इस समय भीड़ कम होती है और आप शांति से प्रतिमा की भव्यता को निहार सकते हैं।)
8. उज्जैन: बड़े गणेश मंदिर कैसे पहुँचें? (How to Reach)
बड़े गणेश मंदिर उज्जैन के सबसे ‘प्राइम और आध्यात्मिक’ क्षेत्र में स्थित है। यह श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के परिसर से सटा हुआ (Adjacent) है।
1. हवाई मार्ग (By Air)
उज्जैन का अपना कोई कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ (DABH) है, जो यहाँ से लगभग 55 किलोमीटर दूर है। इंदौर एयरपोर्ट से आप टैक्सी, कैब या वॉल्वो बस के माध्यम से 1 घंटे में उज्जैन पहुँच सकते हैं।
2. रेल मार्ग (By Train)
उज्जैन जंक्शन (UJN) भारतीय रेलवे के मुख्य स्टेशनों में से एक है और देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।
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रेलवे स्टेशन से दूरी: उज्जैन जंक्शन से बड़े गणेश मंदिर की दूरी मात्र 2 किलोमीटर है।
3. स्थानीय यातायात (Local Transport Guide 2026)
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ई-रिक्शा (E-Rickshaw): उज्जैन रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से आप ई-रिक्शा लेकर ₹20-30 (शेयरिंग) में महाकाल चौराहा या हरसिद्धि चौराहा आ सकते हैं।
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पैदल मार्ग (Walking): यदि आप ‘महाकाल लोक’ या महाकालेश्वर मंदिर में हैं, तो आपको किसी वाहन की आवश्यकता नहीं है। महाकाल मंदिर के वीआईपी गेट (कोटितीर्थ द्वार) से बाहर निकलते ही मात्र 50 से 100 मीटर की पैदल दूरी पर बड़े गणेश जी का मंदिर स्थित है।
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पार्किंग: यदि आप अपनी कार से आ रहे हैं, तो ‘महाकाल महालोक पार्किंग’ या ‘हरसिद्धि पार्किंग’ में अपना वाहन खड़ा करें और वहाँ से 5 मिनट पैदल चलकर मंदिर पहुँचें, क्योंकि मंदिर के बिल्कुल सामने वाली गली में चार-पहिया वाहनों का प्रवेश वर्जित है।
9. 2026 के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण नियम और यात्रा टिप्स (Travel Tips)
अपनी बड़े गणेश मंदिर की यात्रा को पूरी तरह सफल और सुगम बनाने के लिए इन व्यावहारिक सुझावों का अवश्य पालन करें:
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ड्रेस कोड (Dress Code): यद्यपि यहाँ भस्म आरती जैसा कोई अनिवार्य पारंपरिक ड्रेस कोड लागू नहीं है, फिर भी यह एक पवित्र विद्यापीठ और सिद्ध मंदिर है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे मर्यादित और शालीन वस्त्र (धोती-कुर्ता, पैंट-शर्ट, साड़ी, सलवार-सूट) पहनकर ही दर्शन के लिए आएं।
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फोटोग्राफी के नियम: मंदिर के बाहरी प्रांगण में फोटोग्राफी की जा सकती है, लेकिन मुख्य गर्भगृह के अंदर बड़े गणेश जी की क्लोज-अप वीडियोग्राफी या फ्लैश फोटोग्राफी करना वर्जित है। भगवान की आंखों में चमकती दिव्यता को कैमरे की बजाय अपनी आंखों में बसाने का प्रयास करें।
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डिजिटल भुगतान (Digital Donations): वर्ष 2026 में, मंदिर परिसर में प्रसाद खरीदने, ज्योतिषाचार्यों से परामर्श लेने या दान (Donation) करने के लिए UPI (PhonePe, Google Pay, Paytm) की सुविधा हर काउंटर पर उपलब्ध है।
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ज्योतिष परामर्श: यदि आप अपनी जन्म कुंडली (Kundali) दिखाना चाहते हैं या किसी शुभ कार्य का मुहूर्त निकलवाना चाहते हैं, तो मंदिर कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। यहाँ के विद्वान ब्राह्मण बहुत ही उचित दक्षिणा पर सटीक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
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प्रसाद: भगवान गणेश को मोदक और मोतीचूर के लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। मंदिर के बाहर और अंदर प्राधिकृत दुकानों से आप शुद्ध देसी घी के लड्डू खरीदकर भगवान को भोग लगा सकते हैं।
10. बड़े गणेश मंदिर के आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)
चूंकि यह मंदिर उज्जैन के हृदय स्थल पर है, इसके 1 किलोमीटर के दायरे में कई अन्य विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मौजूद हैं। आप अपनी यात्रा को इस प्रकार प्लान करें कि एक ही दिन में इन सभी के दर्शन हो सकें:
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श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और महाकाल लोक: भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और 900 मीटर लंबा भव्य शिव कॉरिडोर। (दूरी: बिल्कुल सटा हुआ / 50 मीटर)
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हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Temple): 51 शक्तिपीठों में से एक, जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी। शाम के समय यहाँ के 51 फीट ऊंचे दीपस्तंभ जलाए जाते हैं। (दूरी: 200 मीटर)
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चारधाम मंदिर (Char Dham Temple): एक ही परिसर में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की भव्य अनुकृति। (दूरी: 300 मीटर)
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रामघाट (Ram Ghat): क्षिप्रा नदी का मुख्य तट जहाँ कुंभ मेले का शाही स्नान होता है और प्रतिदिन शाम को भव्य ‘क्षिप्रा आरती’ का आयोजन किया जाता है। (दूरी: 500 मीटर)
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चौबीस खंभा माता मंदिर: राजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित उज्जैन की रक्षक देवियों का प्राचीन मंदिर। (दूरी: 400 मीटर)
उज्जैन का श्री बड़े गणेश जी का मंदिर केवल विशालता का प्रतीक नहीं है, यह भारत भूमि की पवित्रता, आयुर्वेद की शक्ति, और महर्षि नारायणजी गुरु के उस राष्ट्रीय संकल्प का जीता-जागता स्वरूप है जिसने सप्त पुरियों को एक ही स्थान पर ला खड़ा किया।
ईंट और पत्थरों के बजाय मिट्टी, गुड़, मेथी और पवित्र नदियों के जल से बनी यह 18 फीट ऊंची प्रतिमा यह दर्शाती है कि ईश्वर हमारी प्रकृति, हमारी मिट्टी और हमारी आस्था में ही निवास करते हैं। जब आप महाकाल की नगरी में शिव दर्शन के बाद इस विशाल विघ्नहर्ता के सामने खड़े होते हैं, तो उनका विशाल स्वरूप आपके मन के सारे भयों, चिंताओं और विघ्नों को हर लेता है।
परिसर में स्थित पंचमुखी हनुमान के दर्शन और यहाँ गूंजने वाले संस्कृत के श्लोक आपके भीतर एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। यदि आप वर्ष 2026 में अपने परिवार और बच्चों के साथ उज्जैन आ रहे हैं, तो बड़े गणेश मंदिर की इस चमत्कारी और ऐतिहासिक प्रतिमा के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें।
जय श्री गणेश! जय पंचमुखी हनुमान! जय श्री महाकाल!
12. बड़े गणेश मंदिर, उज्जैन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर की प्रतिमा किस चीज से बनी है?
उत्तर: भगवान गणेश की यह विशाल प्रतिमा पत्थर या सीमेंट की बजाय सप्त पुरियों (अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका, द्वारका) की मिट्टी, पवित्र नदियों के जल, गुड़, मेथी दाना, ईंट के चूरे और कत्थे के आयुर्वेदिक लेप से बनी है।
प्रश्न 2: बड़े गणेश मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर: इस ऐतिहासिक मंदिर और मूर्ति का निर्माण 20वीं शताब्दी की शुरुआत में उज्जैन के महान संत और ज्योतिषाचार्य महर्षि नारायणजी गुरु ने करवाया था, ताकि पूरे भारतवर्ष की पवित्रता को एक ही स्थान पर स्थापित किया जा सके।
प्रश्न 3: बड़े गणेश जी की मूर्ति की ऊंचाई कितनी है?
उत्तर: गर्भगृह में स्थापित भगवान गणेश की यह विशाल और मनमोहक प्रतिमा लगभग 18 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी है।
प्रश्न 4: बड़े गणेश मंदिर महाकालेश्वर मंदिर से कितना दूर है?
उत्तर: यह मंदिर श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बिल्कुल समीप स्थित है। महाकाल मंदिर के वीआईपी गेट (कोटितीर्थ द्वार) से बाहर निकलते ही मात्र 50 से 100 मीटर की दूरी पर बड़े गणेश मंदिर स्थित है।
प्रश्न 5: क्या मंदिर परिसर में भगवान गणेश के अलावा अन्य देवता भी हैं?
उत्तर: जी हाँ, मंदिर परिसर में एक अत्यंत चमत्कारी ‘पंचमुखी हनुमान जी’ की प्रतिमा, एक नवग्रह मंदिर और माता यशोदा के साथ बाल कृष्ण की धातु की प्रतिमा भी स्थापित है।
प्रश्न 6: क्या बड़े गणेश मंदिर में ज्योतिष सीखने या कुंडली दिखाने की सुविधा है?
उत्तर: बिल्कुल। यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि ज्योतिष और संस्कृत का एक बहुत बड़ा विद्यापीठ है। यहाँ से उज्जैन का प्रामाणिक पंचांग प्रकाशित होता है, और श्रद्धालु यहाँ के विद्वान पंडितों से अपनी जन्म कुंडली दिखाकर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।