Triveni Museum Ujjain: त्रिवेणी संग्रहालय का इतिहास और संपूर्ण जानकारीIt takes 13 minutes... to read this article !

भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ‘उज्जैन’ (प्राचीन अवंतिका) को केवल मंदिरों और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध कला, इतिहास और स्थापत्य कला के लिए भी जाना जाता है। जब भी उज्जैन के समृद्ध अतीत, यहाँ की मूर्तिकला और सनातन धर्म की गहरी जड़ों को समझने की बात आती है, तो त्रिवेणी संग्रहालय (Triveni Museum) का नाम सबसे पहले आता है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ‘महाकाल महालोक’ (Mahakal Lok Corridor) और हरसिद्धि माता मंदिर के बिल्कुल समीप स्थित यह संग्रहालय मध्य प्रदेश का एक अत्यंत आधुनिक, भव्य और ज्ञानवर्धक कला केंद्र है। यह कोई साधारण म्यूजियम नहीं है; यह सनातन धर्म की तीन प्रमुख धाराओं—शैव (शिव), वैष्णव (विष्णु), और शाक्त (देवी) परंपराओं का एक अद्भुत संगम है।

वर्ष 2026 में, जब उज्जैन में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन अपने चरम पर है, त्रिवेणी संग्रहालय कला प्रेमियों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और आम श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है। जो श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के बाद उज्जैन के इतिहास और भारतीय मूर्तिकला के विकास को गहराई से समझना चाहते हैं, उनके लिए यहाँ आना एक अविस्मरणीय अनुभव होता है।

इस अत्यंत विस्तृत और संपूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) में हम त्रिवेणी संग्रहालय के इतिहास, इसकी परिकल्पना, तीनों मुख्य दीर्घाओं (Galleries) में मौजूद दुर्लभ कलाकृतियों, वास्तुकला, प्रवेश शुल्क (Ticket Price), दर्शन के समय और आपकी उज्जैन यात्रा को सुगम बनाने वाली हर छोटी-बड़ी जानकारी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

1. त्रिवेणी संग्रहालय: नाम का अर्थ और परिकल्पना (Concept and Meaning)

जब हम ‘त्रिवेणी’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम (जैसे प्रयागराज) का चित्र उभरता है। लेकिन उज्जैन के इस संग्रहालय का नाम ‘त्रिवेणी’ नदियों के आधार पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की तीन प्रमुख वैचारिक और आध्यात्मिक धाराओं के संगम के आधार पर रखा गया है:

  1. शैव परंपरा (Shaivism): भगवान शिव और उनके विभिन्न स्वरूपों की आराधना।

  2. वैष्णव परंपरा (Vaishnavism): भगवान विष्णु, उनके अवतारों (विशेषकर राम और कृष्ण) की उपासना।

  3. शाक्त परंपरा (Shaktism): आदि शक्ति, माता दुर्गा और देवियों के विभिन्न उग्र तथा सौम्य रूपों की पूजा।

त्रिवेणी संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य इन तीनों संप्रदायों की प्राचीन कलाकृतियों, पाषाण मूर्तियों (Stone Sculptures), चित्रों और पांडुलिपियों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित करना है, ताकि दर्शक यह समझ सकें कि भारत में इन तीनों धाराओं का विकास कैसे हुआ और इन्होंने भारतीय कला को कैसे समृद्ध किया।

2. त्रिवेणी संग्रहालय का इतिहास और स्थापना (History and Establishment)

उज्जैन का त्रिवेणी संग्रहालय बहुत प्राचीन इमारत नहीं है; यह मध्य प्रदेश सरकार और संस्कृति विभाग का एक आधुनिक और बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।

सिंहस्थ कुंभ 2016 के दौरान स्थापना

इस भव्य संग्रहालय का निर्माण और उद्घाटन वर्ष 2016 में उज्जैन में आयोजित होने वाले ‘सिंहस्थ कुंभ मेले’ (Simhastha Kumbh Mela) के अवसर पर किया गया था। इसका उद्देश्य कुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और मूर्तिकला की विरासत से परिचित कराना था।

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प्राचीन संपदा का संरक्षण

उज्जैन, मालवा और इसके आस-पास के क्षेत्रों (जैसे मंदसौर, धार, शाजापुर, आगर) में प्राचीन काल (विशेषकर 9वीं से 13वीं शताब्दी के परमार काल) की हजारों दुर्लभ मूर्तियां खुले में, पुराने खंडहरों या छोटे मंदिरों में बिखरी पड़ी थीं। पुरातत्व विभाग ने इन अमूल्य धरोहरों को सहेजने, संरक्षित करने और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए इस संग्रहालय का निर्माण किया।

वर्तमान वर्ष 2026 तक, इस संग्रहालय को और भी आधुनिक बना दिया गया है। इसमें मल्टीमीडिया (Multimedia), ऑडियो-विजुअल (Audio-Visual) गाइड्स और आधुनिक लाइटिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे यह भारत के सर्वश्रेष्ठ कला संग्रहालयों में से एक बन गया है।

3. संग्रहालय की वास्तुकला और परिवेश (Architecture and Ambiance)

त्रिवेणी संग्रहालय की इमारत स्वयं में आधुनिक वास्तुकला और पारंपरिक भारतीय डिजाइन का एक बेहतरीन मिश्रण है।

  • परिसर: संग्रहालय एक विशाल और हरे-भरे परिसर में फैला हुआ है। प्रवेश करते ही आपको एक शांत और कलात्मक वातावरण का अनुभव होता है।

  • बाहरी डिजाइन: भवन का बाहरी हिस्सा लाल और बलुआ पत्थर (Sandstone) के शेड्स से बनाया गया है, जो प्राचीन भारतीय मंदिरों की वास्तुकला की याद दिलाता है।

  • आंतरिक लेआउट: संग्रहालय को तीन मुख्य दीर्घाओं (Galleries) में बांटा गया है। प्रत्येक दीर्घा का रंग, प्रकाश व्यवस्था (Lighting) और पृष्ठभूमि (Background) उस देवता के स्वभाव के अनुसार तय की गई है। उदाहरण के लिए, शैव दीर्घा में रहस्यमयी और आध्यात्मिक प्रकाश है, जबकि शाक्त दीर्घा में उर्जावान लाल और वैष्णव दीर्घा में शांत पीला और नीला प्रकाश उपयोग किया गया है।

4. त्रिवेणी संग्रहालय की तीन मुख्य दीर्घाएं (The Three Grand Galleries)

इस संग्रहालय की आत्मा इसकी तीन दीर्घाएं हैं, जिनमें 5वीं सदी से लेकर 15वीं सदी तक की दुर्लभ पाषाण मूर्तियां (Stone Sculptures), टेराकोटा कलाकृतियां और लघु चित्र (Miniature Paintings) प्रदर्शित किए गए हैं।

1. शैव दीर्घा (Shaiva Gallery – शिव की महिमा)

उज्जैन महाकाल की नगरी है, इसलिए संग्रहालय की शैव दीर्घा सबसे समृद्ध और आकर्षक है। यहाँ भगवान शिव के सौम्य और रौद्र (उग्र) दोनों रूपों को दर्शाया गया है।

  • नटराज की मूर्तियां: शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य (Cosmic Dance) को दर्शाती 10वीं-11वीं शताब्दी की परमार कालीन पाषाण मूर्तियां यहाँ का मुख्य आकर्षण हैं।

  • लिंगोद्भव मूर्ति: शिव के अनादि और अनंत स्वरूप को दर्शाती दुर्लभ मूर्तियां, जिनमें ब्रह्मा और विष्णु शिव लिंग के आदि और अंत की खोज करते हुए दिखाए गए हैं।

  • उमा-महेश्वर (Uma-Maheshwar): शिव और माता पार्वती की एक साथ बैठी हुई अत्यंत प्रेममयी और कलात्मक मूर्तियां, जिनमें शिव के गण और नंदी भी उकेरे गए हैं।

  • भैरव और लकुलीश: शिव के उग्र रूप भैरव और पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश की दुर्लभ प्रतिमाएं भी यहाँ संरक्षित हैं।

2. शाक्त दीर्घा (Shakta Gallery – देवी की शक्ति)

शक्ति उपासना के बिना तंत्र और शिव अधूरे हैं। यह दीर्घा आदि शक्ति के विभिन्न रूपों को समर्पित है।

  • महिषासुरमर्दिनी: माता दुर्गा द्वारा महिषासुर (भैंसे के रूप वाले राक्षस) का वध करते हुए अत्यंत जीवंत और गतिशील (Dynamic) मूर्तियां यहाँ प्रदर्शित हैं। पत्थरों पर माता के क्रोध और राक्षस के भय को जिस बारीकी से उकेरा गया है, वह शिल्पकारों की महानता को दर्शाता है।

  • सप्तमातृका (Saptamatrikas): सात देवियों (ब्राह्मणी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इन्द्राणी और चामुंडा) का समूह। परमार काल की ये मूर्तियां तंत्र साधना और मातृ शक्ति का अद्भुत उदाहरण हैं।

  • चामुंडा और योगिनियाँ: देवी के उग्र और कंकाल स्वरूप (चामुंडा) की मूर्तियां, जो तंत्र शास्त्र में पूजनीय हैं, यहाँ विशेष प्रकाश व्यवस्था के साथ रखी गई हैं।

3. वैष्णव दीर्घा (Vaishnava Gallery – विष्णु और अवतार)

यह दीर्घा भगवान विष्णु, उनके दशावतार और विशेषकर श्री कृष्ण की लीलाओं को समर्पित है।

  • दशावतार (Dashavatara): भगवान विष्णु के दस अवतारों (मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि) को दर्शाने वाले नक्काशीदार पत्थर के पैनल।

  • विष्णु और लक्ष्मी (Laxmi-Narayan): शेषनाग पर शयन करते हुए (शेषशायी विष्णु) और गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु की भव्य प्रतिमाएं।

  • कृष्ण लीला (Krishna Leela): मध्यकालीन लघु चित्रकला (Miniature Paintings) और मूर्तियों के माध्यम से भगवान कृष्ण के जन्म, गोवर्धन धारण, और रासलीला के प्रसंगों को बहुत ही सुंदरता से प्रदर्शित किया गया है।

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5. नवग्रह, सिक्के और लघु चित्रकला (Other Exhibits & Collections)

तीनों मुख्य दीर्घाओं के अलावा, त्रिवेणी संग्रहालय में कई अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं भी प्रदर्शित की गई हैं, जो इतिहास के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए बहुत उपयोगी हैं:

  • नवग्रह पैनल (Navgraha Panels): उज्जैन का ज्योतिष से गहरा संबंध है। संग्रहालय में प्राचीन नवग्रह मंडल और ग्रहों की मूर्तियों के पैनल रखे गए हैं।

  • सिक्के (Numismatics): गुप्त काल, परमार काल और मुग़ल काल के प्राचीन सिक्कों (Coins) का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संग्रह।

  • लघु चित्र (Miniature Paintings): मालवा, राजस्थानी और पहाड़ी शैली की पेंटिंग्स, जिनमें रामायण, महाभारत और रागमाला के दृश्यों को बारीक रंगों से चित्रित किया गया है।

  • ऑडियो-विजुअल रूम: संग्रहालय में एक छोटा थिएटर भी है, जहाँ मध्य प्रदेश की कला, संस्कृति और उज्जैन के इतिहास पर शॉर्ट फिल्में (Documentaries) दिखाई जाती हैं।

6. त्रिवेणी संग्रहालय: समय, टिकट और नियम (Timings & Entry Fee 2026)

अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले संग्रहालय के खुलने का समय और टिकट की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2026 के अद्यतन (Updated) विवरण इस प्रकार हैं:

खुलने और बंद होने का समय (Timings)

  • संग्रहालय खुलने का समय: प्रातः 10:00 बजे

  • संग्रहालय बंद होने का समय: सायं 05:30 बजे

  • साप्ताहिक अवकाश (Closed on): प्रत्येक सोमवार (Monday) और प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों (National Holidays) पर संग्रहालय बंद रहता है।

    (सुझाव: संग्रहालय को अच्छी तरह देखने और समझने के लिए कम से कम 1.5 से 2 घंटे का समय निकालें।)

प्रवेश शुल्क (Ticket Price / Entry Fee)

मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा संग्रहालय का रखरखाव बहुत उच्च स्तर का किया जाता है, जिसके लिए एक बहुत ही मामूली प्रवेश शुल्क निर्धारित है:

दर्शक की श्रेणी (Category) टिकट मूल्य (Ticket Price in INR)
भारतीय नागरिक (Indian Adult) ₹ 20 – ₹ 30 प्रति व्यक्ति
बच्चे (Children below 15 years) प्रवेश निःशुल्क (Free) या बहुत कम शुल्क
विदेशी पर्यटक (Foreign National) ₹ 200 – ₹ 250 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी (Mobile/Camera) वीडियोग्राफी और प्रोफेशनल कैमरे के लिए अलग से शुल्क (₹ 50 – ₹ 100) लग सकता है। (सामान्य मोबाइल फोटोग्राफी बिना फ्लैश के अक्सर अनुमत होती है)।

(नोट: टिकट की दरें समय-समय पर प्रशासन द्वारा बदली जा सकती हैं।)

7. संग्रहालय में पर्यटकों के लिए सुविधाएं (Facilities for Visitors)

वर्ष 2026 में त्रिवेणी संग्रहालय को पूरी तरह से ‘टूरिस्ट-फ्रेंडली’ (Tourist-Friendly) बना दिया गया है:

  1. गाइड और ऑडियो गाइड: कलाकृतियों के इतिहास को गहराई से समझने के लिए आप यहाँ से गाइड हायर कर सकते हैं या ऑडियो गाइड (Audio Guide) डिवाइस ले सकते हैं।

  2. कैफेटेरिया (Cafeteria): परिसर के अंदर एक साफ-सुथरा कैफेटेरिया है जहाँ आप चाय, कॉफी और स्नैक्स का आनंद ले सकते हैं।

  3. सॉवनेर शॉप (Souvenir Shop): मध्य प्रदेश के हस्तशिल्प (Handicrafts), किताबें और स्मृति चिह्न (Souvenirs) खरीदने के लिए एक सरकारी दुकान उपलब्ध है।

  4. व्हीलचेयर (Wheelchair Access): बुजुर्गों और दिव्यांग जनों के लिए संग्रहालय पूरी तरह से सुलभ है। यहाँ रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।

  5. स्वच्छता: परिसर में अत्यंत स्वच्छ प्रसाधन (Washrooms) और पीने के पानी (RO Water) की सुविधा मौजूद है।

8. उज्जैन: त्रिवेणी संग्रहालय कैसे पहुँचें? (How to Reach Triveni Museum)

त्रिवेणी संग्रहालय उज्जैन के सबसे ‘प्राइम लोकेशन’ पर स्थित है। यह ‘महाकाल महालोक’ कॉरिडोर के बिल्कुल पीछे और हरसिद्धि माता मंदिर के समीप जयसिंहपुरा क्षेत्र में है।

1. हवाई मार्ग (By Air)

उज्जैन का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय विमानतल’ (DABH) है। इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी बुक करके सीधे संग्रहालय पहुँच सकते हैं।

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2. रेल मार्ग (By Train)

उज्जैन जंक्शन (UJN) रेलवे स्टेशन भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

  • रेलवे स्टेशन से दूरी: उज्जैन जंक्शन से त्रिवेणी संग्रहालय की दूरी मात्र 2.5 से 3 किलोमीटर है।

3. स्थानीय यातायात (Local Transport)

  • ई-रिक्शा (E-Rickshaw) और ऑटो: उज्जैन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या महाकाल चौराहे से आप ई-रिक्शा (शेयरिंग या रिज़र्व) लेकर आसानी से त्रिवेणी संग्रहालय पहुँच सकते हैं।

  • पैदल मार्ग (Walking): यदि आप महाकाल लोक (Mahakal Lok Corridor) में हैं, तो वहाँ से त्रिवेणी संग्रहालय मात्र 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी (Walking distance) पर है।

  • पार्किंग: यदि आप अपनी कार (Car/SUV) से आ रहे हैं, तो संग्रहालय के बाहर और पास ही में ‘हरसिद्धि पार्किंग’ व ‘मन्नत गार्डन पार्किंग’ की विशाल व्यवस्था उपलब्ध है।

9. संग्रहालय दर्शन के लिए नियम और सावधानियां (Rules and Etiquette)

एक राष्ट्रीय धरोहर और संग्रहालय होने के नाते, पर्यटकों से कुछ अनुशासन की अपेक्षा की जाती है:

  1. मूर्तियों को न छुएं (Do Not Touch): प्राचीन मूर्तियों पर पसीने और तेल के रसायन (Chemicals) का बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी भी कलाकृति या पत्थर को छूना सख्त मना है।

  2. फ्लैश फोटोग्राफी वर्जित (No Flash): आप तस्वीरें ले सकते हैं, लेकिन कैमरे या मोबाइल का फ्लैश (Flash) चालू न करें। फ्लैश की तेज रोशनी प्राचीन रंगों और पत्थरों को नुकसान पहुंचाती है।

  3. शांति बनाए रखें: यह एक अध्ययन और कला का केंद्र है। जोर-जोर से बातें न करें और बच्चों को दौड़ने या शोर मचाने से रोकें।

  4. खाद्य पदार्थ: दीर्घाओं (Galleries) के अंदर पानी की बोतल या कोई भी खाने की चीज (Snacks) ले जाना वर्जित है। इसके लिए कैफेटेरिया का उपयोग करें।

10. त्रिवेणी संग्रहालय के आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)

अपनी यात्रा को बेहतर बनाने के लिए आप त्रिवेणी संग्रहालय के साथ-साथ इन स्थानों को भी उसी दिन कवर कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी 1 किलोमीटर के दायरे में हैं:

  1. श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और महाकाल लोक: भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और 900 मीटर लंबा भव्य शिव कॉरिडोर। संग्रहालय के बिल्कुल बगल में स्थित है।

  2. हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Temple): 51 शक्तिपीठों में से एक, जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी। (दूरी: 200 मीटर)

  3. चारधाम मंदिर (Char Dham Temple): एक ही परिसर में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की भव्य अनुकृति। (दूरी: 300 मीटर)

  4. रामघाट (Ram Ghat): क्षिप्रा नदी का मुख्य तट जहाँ कुंभ मेले का शाही स्नान होता है। (दूरी: 600 मीटर)

  5. बड़े गणेशजी का मंदिर: भगवान गणेश की विशाल और चमत्कारी प्रतिमा।

उज्जैन का त्रिवेणी संग्रहालय केवल पुराने पत्थरों और मूर्तियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास, भारतीय शिल्पकारों की अद्वितीय प्रतिभा और हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत दर्पण है।

जब आप महाकाल मंदिर की भस्म आरती या महाकाल लोक की भव्यता देखकर बाहर आते हैं, तो आपके मन में भारतीय धर्म और कला के प्रति कई प्रश्न उठते हैं। त्रिवेणी संग्रहालय की शैव, शाक्त और वैष्णव दीर्घाएं आपको उन सभी प्रश्नों के उत्तर देती हैं। 10वीं और 11वीं शताब्दी की उन पाषाण मूर्तियों के सामने खड़े होकर, जिन्हें परमार राजाओं के समय में तराशा गया था, आप महसूस कर सकते हैं कि हमारी सभ्यता कितनी उन्नत और सौंदर्यपूर्ण थी।

यदि आप वर्ष 2026 में उज्जैन की यात्रा कर रहे हैं, विशेषकर यदि आपके साथ बच्चे या विद्यार्थी हैं, तो अपने यात्रा कार्यक्रम (Itinerary) में ‘त्रिवेणी संग्रहालय’ के लिए 2 घंटे का समय अवश्य निकालें। यह स्थान आपको न केवल जानकारी देगा, बल्कि भारतीय होने के गौरव से भी भर देगा।

कला, धर्म और इतिहास के इस अद्भुत संगम (त्रिवेणी) में आपका स्वागत है!

11. त्रिवेणी संग्रहालय से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: त्रिवेणी संग्रहालय का नाम ‘त्रिवेणी’ क्यों रखा गया है?

उत्तर: इस संग्रहालय का नाम नदियों (गंगा, यमुना, सरस्वती) पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की तीन प्रमुख विचारधाराओं—शैव (शिव), वैष्णव (विष्णु), और शाक्त (देवी) परंपराओं के कलात्मक संगम के आधार पर रखा गया है।

प्रश्न 2: त्रिवेणी संग्रहालय उज्जैन में किस दिन बंद रहता है?

उत्तर: त्रिवेणी संग्रहालय प्रत्येक सप्ताह सोमवार (Monday) को बंद रहता है। इसके अलावा कुछ प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों पर भी यह बंद रह सकता है।

प्रश्न 3: त्रिवेणी संग्रहालय महाकालेश्वर मंदिर से कितनी दूर है?

उत्तर: त्रिवेणी संग्रहालय महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक कॉरिडोर के बिल्कुल समीप स्थित है। महाकाल लोक से यहाँ की पैदल दूरी मात्र 5 से 10 मिनट की है।

प्रश्न 4: संग्रहालय में मुख्य रूप से क्या प्रदर्शित किया गया है?

उत्तर: यहाँ मुख्य रूप से 5वीं से 15वीं शताब्दी (विशेषकर परमार काल) की दुर्लभ पाषाण मूर्तियां, लघु चित्रकला (Miniature Paintings), सिक्के, नवग्रह पैनल और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की ऐतिहासिक पुरातात्विक संपदा प्रदर्शित की गई है।

प्रश्न 5: क्या त्रिवेणी संग्रहालय के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति है?

उत्तर: जी हाँ, सामान्य मोबाइल फोटोग्राफी की अनुमति होती है, लेकिन कलाकृतियों को नुकसान से बचाने के लिए ‘फ्लैश’ (Flash) का उपयोग करना सख्त वर्जित है। प्रोफेशनल कैमरे या वीडियोग्राफी के लिए आपको अलग से टिकट/अनुमति लेनी पड़ सकती है।

Amit Tiwari (Ujjain)

"नमस्कार, मेरा नाम अमित तिवारी है और मैं ujjainmahakal.co.in का संस्थापक (Founder) तथा मुख्य लेखक हूँ। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव है। इस वेबसाइट की स्थापना के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य भगवान महाकालेश्वर की महिमा, उज्जैन के प्राचीन मंदिरों और यहाँ की सनातन संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी आप सभी भक्तों तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाना है। मेरी कोशिश रहती है कि महाकाल के हर भक्त को घर बैठे यहाँ की दिव्यता और सटीक जानकारी प्राप्त हो। जय श्री महाकाल!"

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