Sawan 2026 in Ujjain: महाकाल की नगरी में सावन का महा-उत्सव! Complete Guide & Darshan RulesIt takes 14 minutes... to read this article !

भारत की मोक्षदायिनी और आध्यात्मिक राजधानी ‘उज्जैन’ (प्राचीन अवंतिका) में वर्ष का हर दिन उत्सव के समान होता है, लेकिन जब बात ‘श्रावण मास’ (Sawan Month) की हो, तो इस नगरी की छटा ही अलौकिक हो जाती है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, दक्षिणमुखी श्री महाकालेश्वर भगवान केवल एक मंदिर के देवता नहीं हैं, बल्कि वे उज्जैन के ‘राजाधिराज’ हैं। सावन के महीने में जब वर्षा की फुहारें इस पवित्र नगरी को भिगोती हैं, तो उज्जैन का कण-कण शिवमय हो जाता है।

चारों ओर गूंजते ‘ओम नमः शिवाय’ के मंत्र, गेरुआ वस्त्र धारण किए कावड़ियों का जनसैलाब, शंख-डमरुओं की ध्वनि और महाकाल लोक की भव्यता—यह सब मिलकर सावन में उज्जैन को पृथ्वी पर साक्षात शिवलोक बना देते हैं।

वर्ष 2026 में, ‘श्री महाकाल महालोक’ के निर्माण के बाद से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सावन के इस पवित्र महीने में उज्जैन की यात्रा किसी भी शिवभक्त के लिए जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव है। यदि आप भी 2026 के सावन में बाबा महाकाल के दर्शनों की योजना बना रहे हैं, तो यह ‘The Ultimate Guide’ आपके लिए है।

इस विस्तृत लेख में हम सावन 2026 की तिथियों, महाकालेश्वर दर्शन के नए नियमों, भस्म आरती, बाबा महाकाल की शाही सवारी, नागपंचमी के विशेष दर्शन, रहने-खाने की व्यवस्था और उज्जैन के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की पूरी जानकारी प्रदान करेंगे।

1. सावन मास का महत्व और उज्जैन से इसका संबंध (Significance of Sawan)

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण (सावन) मास भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीना है। पौराणिक कथाओं (समुद्र मंथन) के अनुसार, इसी महीने में देवों और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, जिसमें से भयंकर ‘हलाहल’ विष निकला था। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की भयंकर गर्मी को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर निरंतर जल और दूध का अभिषेक किया।

यही कारण है कि सावन के महीने में भगवान शिव पर जल और पंचामृत चढ़ाने (अभिषेक करने) का सबसे अधिक महत्व है। उज्जैन में, जो कि महाकाल की नगरी है, सावन का महीना एक राजकीय और आध्यात्मिक महापर्व की तरह मनाया जाता है। यहाँ महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है, जो सावन में अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

2. महाकालेश्वर मंदिर: सावन 2026 के लिए नई दर्शन व्यवस्था (New Darshan Rules)

सावन के महीने में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए आते हैं। विशेषकर सोमवार के दिन यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। भीड़ को सुगमता से नियंत्रित करने और सभी को सुरक्षित दर्शन कराने के लिए वर्ष 2026 में उज्जैन जिला प्रशासन ने कई नए नियम लागू किए हैं:

गर्भगृह में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित (Sanctum Sanctorum Entry Banned)

सावन मास के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह (Garbhagriha) में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहता है।

  • यह नियम आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ वीआईपी (VIP) और वीवीआईपी (VVIP) सभी पर समान रूप से लागू होता है।

  • भक्त नंदी हॉल के पीछे बने ‘गणेश मंडपम’ और ‘कार्तिकेय मंडपम’ से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।

  • जल अर्पण: भगवान को जल चढ़ाने के लिए मंदिर प्रांगण में बाहर की ओर बड़े पीतल और तांबे के जलपात्र (Pipes) लगाए गए हैं। श्रद्धालु इन्ही पात्रों में जल और दूध अर्पित करते हैं, जो सीधे गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग तक पहुँचता है।

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महाकाल लोक से होगा प्रवेश (Entry and Zig-Zag Queue)

  • श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश ‘श्री महाकाल महालोक’ के नंदी द्वार (Nandi Dwar) से दिया जाएगा।

  • कॉरिडोर से होते हुए भक्त मानसरोवर फेसिलिटी सेंटर (Mansarovar Facility Center) पहुँचेंगे। यहाँ से बैरिकेड्स के माध्यम से लंबी कतारें आगे बढ़ेंगी।

  • श्रद्धालुओं को धूप और बारिश से बचाने के लिए पूरे कतार मार्ग पर वॉटरप्रूफ शेड (Shed) और मैट बिछाए गए हैं। पीने के पानी की भी निरंतर व्यवस्था रहती है।

सशुल्क शीघ्र दर्शन (Fast-Track Entry)

यदि आप लंबी लाइन से बचना चाहते हैं, तो 250 रुपये की ‘शीघ्र दर्शन रसीद’ (VIP Darshan Ticket) प्राप्त कर सकते हैं।

  • यह रसीद ऑनलाइन या मंदिर के निर्धारित काउंटरों से प्राप्त की जा सकती है।

  • इसका प्रवेश आमतौर पर गेट नंबर 4 (भस्म आरती गेट) या प्रशासन द्वारा तय किए गए नए वीआईपी गेट से होता है।

  • (नोट: सावन के सोमवार और अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में प्रशासन इस सशुल्क सुविधा को कुछ घंटों के लिए रोक भी सकता है, इसलिए हमेशा अपडेट रहें।)

3. सावन का सबसे बड़ा आकर्षण: भस्म आरती (Bhasma Aarti in Sawan)

महाकालेश्वर मंदिर की ‘भस्म आरती’ पूरे विश्व में अद्वितीय है। तड़के सुबह 4:00 बजे होने वाली इस आरती में भगवान शिव को ताजी भस्म (राख) रमाई जाती है। सावन के महीने में इस आरती के दर्शन करना हर भक्त का सपना होता है।

भस्म आरती की बुकिंग प्रक्रिया (Booking Process 2026)

  • ऑनलाइन बुकिंग: सावन में भस्म आरती की बुकिंग मिलना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि स्लॉट्स महीनों पहले फुल हो जाते हैं। यदि आप 2026 के सावन में जा रहे हैं, तो अपनी यात्रा की तिथि से कम से कम 30 से 60 दिन पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट (shrimahakaleshwar.com) पर जाकर स्लॉट चेक करें और बुक करें।

  • ऑफलाइन बुकिंग: एक दिन पहले सुबह मंदिर के काउंटर पर लाइन में लगकर भी ऑफलाइन पास लिए जा सकते हैं, लेकिन सावन में इसके लिए रात से ही लाइन लग जाती है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

चल भस्म आरती (Moving Bhasma Aarti)

जो श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग नहीं कर पाते, उनके लिए मंदिर समिति ‘चल भस्म आरती’ की व्यवस्था करती है। इसमें सुबह 4 बजे से ही भक्तों की कतार को चलाया जाता है, और भक्त कार्तिकेय मंडपम से चलते हुए (रुकने की अनुमति नहीं होती) भस्म आरती के दर्शन कर सकते हैं।

भस्म आरती का ड्रेस कोड (Dress Code)

यदि आपके पास भस्म आरती का पास है और आप नंदी हॉल में बैठ रहे हैं, तो ड्रेस कोड अनिवार्य है:

  • पुरुषों के लिए: केवल बिना सिला हुआ सूती वस्त्र यानी ‘धोती और सोला’ (Dhoti)।

  • महिलाओं के लिए: साड़ी (Saree)। (सलवार-सूट या अन्य पश्चिमी परिधान में प्रवेश वर्जित है)।

4. बाबा महाकाल की शाही सवारी (The Royal Procession of Lord Shiva)

सावन के महीने का सबसे भव्य और राजकीय समारोह बाबा महाकाल की ‘सवारी’ (Sawari) है। सिंधिया राजवंश के समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, सावन और भादौ मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

सवारी का अद्भुत नजारा

  • शाम 4:00 बजे मंदिर के कोटितीर्थ द्वार पर मध्य प्रदेश पुलिस के सशस्त्र जवानों द्वारा भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दी जाती है।

  • भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों (जैसे मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, शिव-तांडव) की चांदी की प्रतिमा को एक भव्य ‘रजत पालकी’ में सजाकर निकाला जाता है।

  • पालकी के आगे पुलिस बैंड, घुड़सवार, मलखंब के खिलाड़ी, और हजारों की संख्या में भजन मंडलियां डमरू और झांझ-मंजीरे बजाते हुए चलती हैं।

  • सवारी गुदरी चौराहा से होते हुए क्षिप्रा नदी के पवित्र रामघाट (Ramghat) पहुँचती है, जहाँ सूर्यास्त के समय क्षिप्रा के जल से भगवान का अभिषेक और महाआरती होती है। इसके बाद सवारी शहर के अन्य मार्गों से होते हुए रात को पुनः मंदिर लौट आती है।

(यात्रा टिप: सवारी देखने के लिए रामघाट की सीढ़ियां या गोपाल मंदिर का क्षेत्र सबसे बेहतरीन स्थान है। दोपहर 2 बजे तक ही अपना स्थान सुरक्षित कर लें, क्योंकि बाद में भारी भीड़ के कारण जगह नहीं मिलती।)

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5. नागपंचमी का महा-पर्व और श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nag Panchami Special)

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ‘नागपंचमी’ (Nag Panchami) का पर्व मनाया जाता है। उज्जैन में यह दिन इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे (सबसे ऊपरी) तल पर स्थित ‘श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर’ (Nagchandreshwar Temple) के कपाट खोले जाते हैं।

साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए खुलते हैं कपाट

  • यह मंदिर पूरे वर्ष बंद रहता है और केवल नागपंचमी के दिन मध्यरात्रि 12 बजे से लेकर अगले दिन मध्यरात्रि 12 बजे तक (मात्र 24 घंटे के लिए) दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है।

  • यहाँ 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती दस फणों वाले नागराज तक्षक (Takshak Nag) के आसन पर विराजमान हैं।

  • मान्यता है कि इस दिन नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन करने से भयंकर से भयंकर कालसर्प दोष (Kaal Sarp Dosh) और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।

(व्यवस्था टिप: नागपंचमी पर 5 से 8 लाख श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। इसके लिए मंदिर प्रांगण में विशेष एयरोब्रिज और अलग से कतारें बनाई जाती हैं।)

6. सावन में उज्जैन के अन्य प्रमुख दर्शनीय मंदिर (Other Must-Visit Temples)

महाकालेश्वर के अलावा, उज्जैन में कई अन्य प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं, जहाँ सावन में विशेष अनुष्ठान और भीड़ होती है:

1. श्री कालभैरव मंदिर (Kaal Bhairav Temple)

उज्जैन के कोतवाल और सेनापति माने जाने वाले कालभैरव के दर्शन के बिना महाकाल की यात्रा अधूरी है।

  • यहाँ भगवान को साक्षात मदिरा (Liquor) का भोग लगाया जाता है।

  • सावन में भीड़ को देखते हुए मदिरा भोग की त्वरित व्यवस्था की जाती है। श्रद्धालुओं को गर्भगृह के सामने रुकने की अनुमति नहीं होती।

2. श्री मंगलनाथ मंदिर (Mangalnath Temple)

पूरी दुनिया में मंगल ग्रह की जन्मभूमि और कर्क रेखा का केंद्र मंगलनाथ मंदिर है।

  • सावन के महीने में यहाँ ‘मंगल दोष’ निवारण के लिए ‘भात पूजा’ (Bhaat Puja) की जाती है।

  • यदि आप सावन में भात पूजा कराना चाहते हैं, तो मंदिर समिति या पुजारियों से पहले से स्लॉट बुक कर लें।

3. माता हरसिद्धि शक्तिपीठ (Harsiddhi Temple)

51 शक्तिपीठों में से एक, जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी।

  • यहाँ शाम के समय 51 फीट ऊंचे दो विशाल दीपस्तंभों को प्रज्वलित किया जाता है। सावन की शाम को बारिश की फुहारों के बीच इन दीपकों को जलते हुए देखना एक दिव्य अनुभव है।

4. श्री चिंतामण गणेश और बड़े गणेश मंदिर

सावन में भगवान शिव के साथ उनके पुत्र गणेश जी की आराधना भी फलदायी है। महाकाल मंदिर के बिल्कुल समीप बड़े गणेश मंदिर और शहर से कुछ दूर चिंतामण गणेश मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

5. सिद्धवट घाट (Siddhavat)

क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट (अमर वटवृक्ष) पितृ तर्पण और कालसर्प दोष की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। सावन में यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।

7. कावड़ यात्रा और रामघाट स्नान (Kanwar Yatra & Kshipra Snan)

सावन का महीना कावड़ियों (Kanwariyas) के बिना अधूरा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से लाखों कावड़िए पैदल चलकर उज्जैन आते हैं।

  • क्षिप्रा स्नान: उज्जैन में क्षिप्रा नदी के रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर स्नान का अत्यधिक महत्व है। कावड़िए यहीं से जल भरकर बाबा महाकाल को अर्पित करते हैं।

  • प्रशासनिक व्यवस्था: सावन में क्षिप्रा का जलस्तर बढ़ जाता है। सुरक्षा के लिए घाटों पर गोताखोर (Divers) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें 24 घंटे तैनात रहती हैं। घाटों को गहरे पानी से बचाने के लिए बैरिकेड्स लगाए जाते हैं।

8. उज्जैन में ठहरने और भोजन की व्यवस्था (Accommodation & Food in Sawan)

सावन 2026 में उज्जैन में रुकने के लिए आपको पहले से योजना बनानी होगी, क्योंकि इस दौरान शहर पूरी तरह पैक रहता है।

कहाँ रुकें? (Where to Stay)

  1. महाकाल मंदिर के पास: महाकाल घाटी, हरसिद्धि मार्ग और रामघाट के पास कई बजट होटल्स और धर्मशालाएं हैं। यहाँ रुकने का लाभ यह है कि मंदिर पैदल दूरी पर रहता है।

  2. इंदौर रोड और भरतपुरी: यदि आप शांति और अच्छी सुविधाएं चाहते हैं, तो इंदौर रोड या इस्कॉन मंदिर (भरतपुरी) के पास 3-स्टार और 4-स्टार होटल्स बुक कर सकते हैं।

  3. आश्रम और भक्त निवास: महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा संचालित ‘महाकाल भक्त निवास’, ‘इस्कॉन गेस्ट हाउस’ और ‘चारधाम मंदिर धर्मशाला’ में ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है।

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सावन में क्या खाएं? (Sattvic Food Options)

सावन के पवित्र महीने में उज्जैन के अधिकांश भोजनालय शुद्ध शाकाहारी और सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन) परोसते हैं।

  • पोहा-जलेबी: उज्जैन की प्रसिद्ध सुबह की शुरुआत।

  • मालवी थाली: दाल-बाफले, लड्डू और कढ़ी यहाँ का पारंपरिक भोजन है।

  • गोविंदास रेस्टोरेंट: इस्कॉन मंदिर परिसर में स्थित ‘गोविंदास’ में आपको पूरी तरह सात्विक और भगवान को भोग लगा हुआ स्वादिष्ट कृष्ण प्रसादम मिलेगा।

  • उपवास का भोजन: यदि आप सावन का व्रत रख रहे हैं, तो उज्जैन में हर जगह फलाहारी खिचड़ी, साबूदाना वड़ा और दूध-जलेबी आसानी से मिल जाते हैं।

9. उज्जैन कैसे पहुँचें? (Travel Guide & Connectivity 2026)

उज्जैन मध्य प्रदेश का एक प्रमुख जंक्शन है, जहाँ पहुँचना बहुत ही आसान है:

  • हवाई मार्ग (By Air): उज्जैन में कोई कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। निकटतम एयरपोर्ट इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय विमानतल’ (DABH) है (दूरी लगभग 55 किमी)। एयरपोर्ट से आप कैब या बस से 1 घंटे में उज्जैन पहुँच सकते हैं।

  • रेल मार्ग (By Train): उज्जैन जंक्शन (UJN) भारत के सभी प्रमुख रेलवे नेटवर्क्स से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, नागपुर, और गुजरात से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर मात्र 2 किमी दूर है।

  • सड़क मार्ग (By Road): 2026 में उज्जैन के लिए फोर-लेन और सिक्स-लेन हाईवे का नेटवर्क बहुत शानदार है। इंदौर, भोपाल, कोटा और अहमदाबाद से यहाँ आसानी से ड्राइव करके पहुँचा जा सकता है।

शहर में लोकल ट्रांसपोर्ट (Local Transport & Traffic Diversions)

सावन के महीने में शहर के अंदर ट्रैफिक व्यवस्था में भारी बदलाव होते हैं:

  • महाकाल मंदिर, रामघाट और हरसिद्धि चौराहे के 1-2 किलोमीटर के दायरे को “नो व्हीकल ज़ोन” (No Vehicle Zone) घोषित कर दिया जाता है।

  • बाहरी वाहनों को शहर के बाहर कर्कराज पार्किंग या हरिफाटक बायपास पर खड़ा करना होता है।

  • वहाँ से मंदिर तक पहुँचने के लिए ई-रिक्शा (E-Rickshaws) और प्रशासन की निःशुल्क शटल बसें निरंतर चलती रहती हैं।

10. सावन में उज्जैन यात्रा के लिए महत्वपूर्ण नियम और प्रैक्टिकल टिप्स (Practical Tips)

अपनी सावन यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. बारिश से बचाव: सावन में उज्जैन में अच्छी बारिश होती है। अपने साथ रेनकोट (Raincoat), छाता और एंटी-स्लिप (Anti-slip) फुटवियर जरूर रखें। महाकाल लोक के मार्बल फर्श पर बारिश में फिसलने का डर रहता है।

  2. सुरक्षा (Anti-theft): भारी भीड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। अपने महंगे आभूषण, सोने की चेन और ज्यादा नकद (Cash) साथ न रखें।

  3. मोबाइल बैन: मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है। इसे होटल में छोड़ आएं या बाहर निशुल्क लॉकर रूम में सुरक्षित जमा करें।

  4. दलालों से दूर रहें: वीआईपी दर्शन या जल्दी पूजा कराने के नाम पर कई लोग ठगी कर सकते हैं। केवल आधिकारिक काउंटरों और वेबसाइट का ही उपयोग करें।

  5. समय प्रबंधन: सावन के सोमवार को और नागपंचमी के दिन 4 से 6 घंटे तक कतार में लगना पड़ सकता है। शारीरिक और मानसिक रूप से इसके लिए तैयार रहें और अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें।

Sawan 2026 in Ujjain केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक जन्म-जन्मांतर का आध्यात्मिक अनुभव है। महाकालेश्वर की इस पावन भूमि पर आकर ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो और पूरी सृष्टि भगवान शिव के चरणों में वंदना कर रही हो।

महाकाल लोक की विशाल मूर्तियों को निहारना, रामघाट पर संध्या के समय क्षिप्रा की आरती में शामिल होना, और भस्म आरती में बाबा को त्रिनेत्र धारण करते हुए देखना—ये वो पल हैं जो जीवन के सारे संताप और दुखों को हर लेते हैं।

हालाँकि सावन में भीड़ और प्रशासन के कड़े नियमों के कारण थोड़ी शारीरिक थकान हो सकती है, लेकिन जैसे ही आप गर्भगृह की चौखट से बाबा महाकाल के उस तेजोमय शिवलिंग के दर्शन करते हैं, सारी थकान एक पल में छूमंतर हो जाती है।

तैयारी कीजिए 2026 के इस सावन महोत्सव की, अपने मन में श्रद्धा का भाव रखिए और उज्जैन की इस मोक्षदायिनी धरती पर कदम रखिए। राजाधिराज महाकाल आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करेंगे।

“अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े, जो भक्त हो महाकाल का!”

जय श्री महाकाल!

सावन 2026 उज्जैन यात्रा से जुड़े (FAQs)

प्रश्न 1: सावन 2026 में महाकाल मंदिर के दर्शन का समय क्या रहेगा?

उत्तर: सावन मास में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर के पट (कपाट) सुबह 3:00 बजे (भस्म आरती के समय) खुल जाते हैं और रात 11:00 बजे शयन आरती तक अनवरत दर्शन चालू रहते हैं।

प्रश्न 2: क्या सावन में महाकाल के वीआईपी दर्शन (VIP Darshan) की अनुमति होती है?

उत्तर: सावन में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था सीमित कर दी जाती है। गर्भगृह में प्रवेश किसी भी वीआईपी के लिए भी प्रतिबंधित रहता है। शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपये की रसीद की व्यवस्था रहती है, जिसे प्रशासन भीड़ बढ़ने पर (विशेषकर सोमवार को) रोक सकता है।

प्रश्न 3: सावन सोमवार को महाकाल की सवारी देखने के लिए सबसे अच्छी जगह कौन सी है?

उत्तर: सवारी देखने का सबसे अद्भुत अनुभव क्षिप्रा नदी के ‘रामघाट’ पर होता है, जहाँ सूर्यास्त के समय भगवान का अभिषेक और महाआरती होती है। इसके अलावा छत्रीचौक और गोपाल मंदिर के पास भी शानदार दर्शन होते हैं।

प्रश्न 4: नागपंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट कितने बजे खुलते हैं?

उत्तर: नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार खुलता है। नागपंचमी के दिन इसके कपाट मध्यरात्रि (रात 12:00 बजे) खुलते हैं और ठीक 24 घंटे बाद अगली मध्यरात्रि को बंद कर दिए जाते हैं।

प्रश्न 5: क्या सावन में मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा कराई जा सकती है?

उत्तर: जी हाँ, सावन में मंगल दोष निवारण के लिए मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा कराई जा सकती है। लेकिन भारी भीड़ के कारण आपको मंदिर समिति या अधिकृत पुजारियों से पहले ही अपना टाइम स्लॉट बुक करना अनिवार्य होगा।

Amit Tiwari (Ujjain)

"नमस्कार, मेरा नाम अमित तिवारी है और मैं ujjainmahakal.co.in का संस्थापक (Founder) तथा मुख्य लेखक हूँ। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव है। इस वेबसाइट की स्थापना के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य भगवान महाकालेश्वर की महिमा, उज्जैन के प्राचीन मंदिरों और यहाँ की सनातन संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी आप सभी भक्तों तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाना है। मेरी कोशिश रहती है कि महाकाल के हर भक्त को घर बैठे यहाँ की दिव्यता और सटीक जानकारी प्राप्त हो। जय श्री महाकाल!"

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