Juna Mahakal Temple Ujjain: मंदिर का इतिहास, दर्शन समय और संपूर्ण जानकारीIt takes 13 minutes... to read this article !

मध्य प्रदेश की पावन नगरी उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका के नाम से जाना जाता था, मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर बसी है। यह नगरी मुख्य रूप से भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री महाकालेश्वर (Mahakaleshwar Jyotirlinga) के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने उज्जैन पहुंचते हैं। लेकिन, महाकाल मंदिर परिसर में ही एक और अत्यंत प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर स्थित है, जिसके बारे में कई लोगों को पूरी जानकारी नहीं होती। इस मंदिर का नाम है— जूना महाकाल मंदिर (Juna Mahakal Temple)

‘जूना’ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘पुराना’ या ‘प्राचीन’। स्थानीय मान्यताओं और कई इतिहासकारों के अनुसार, जूना महाकाल ही भगवान शिव का वह आदि स्वरूप हैं, जो प्राचीन काल से पूजे जा रहे हैं। मान्यता है कि बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक कि श्रद्धालु जूना महाकाल के दर्शन न कर लें।

इस विस्तृत लेख में, हम जूना महाकाल मंदिर के उद्भव, इसके ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व, दर्शन के समय, और उज्जैन यात्रा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

जूना महाकाल का अर्थ और धार्मिक महत्व

महाकालेश्वर मंदिर परिसर में कोटि तीर्थ कुंड के समीप स्थित यह मंदिर सदियों से भक्तों की असीम आस्था का केंद्र रहा है।

  • ‘जूना’ शब्द की उत्पत्ति: मालवा और गुजरात क्षेत्र में ‘जूना’ शब्द का प्रयोग किसी भी अत्यंत प्राचीन वस्तु या स्थान के लिए किया जाता है (जैसे गुजरात का जूनागढ़)। ‘जूना महाकाल’ का सीधा अर्थ है— पुराने महाकाल (Old Mahakal)

  • पूर्ण दर्शन की मान्यता: शिव पुराण और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मुख्य ज्योतिर्लिंग के दर्शन के पश्चात जूना महाकाल के दर्शन करना अनिवार्य माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जूना महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाए बिना महाकाल की तीर्थ यात्रा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।

  • स्पर्श दर्शन की सुलभता: मुख्य महाकाल मंदिर में भयंकर भीड़ होने के कारण आम दिनों में गर्भगृह में प्रवेश और शिवलिंग को स्पर्श करना लगभग असंभव होता है। लेकिन जूना महाकाल मंदिर में श्रद्धालु आसानी से जाकर भगवान शिव का स्पर्श कर सकते हैं, उन्हें अपने हाथों से जल, बिल्वपत्र और भस्म अर्पित कर सकते हैं। यह आत्मीय जुड़ाव भक्तों को एक असीम मानसिक शांति प्रदान करता है।

जूना महाकाल मंदिर का गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास

जूना महाकाल मंदिर का इतिहास उज्जैन के धार्मिक उत्थान और विदेशी आक्रांताओं के विध्वंस की कहानी बयां करता है। इस मंदिर के इतिहास को हम मुख्य रूप से तीन कालखंडों में समझ सकते हैं:

1. प्राचीन महाकाल वन और आदि स्वरूप

सतयुग और त्रेतायुग के पौराणिक ग्रंथों (विशेषकर स्कंद पुराण के अवंती खंड) में उज्जैन के इस क्षेत्र को ‘महाकाल वन’ कहा गया है। यह वह स्थान था जहां ऋषि-मुनि घोर तपस्या करते थे। कहा जाता है कि जूना महाकाल वही मूल स्थान है जहां भगवान शिव ने दूषण नामक राक्षस का वध करने के बाद ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित होने का वरदान दिया था।

2. इल्तुतमिश का आक्रमण और शिवलिंग की रक्षा (1235 ईस्वी)

भारतीय इतिहास का वह पन्ना बेहद काला है जब विदेशी आक्रांताओं ने भारत के मंदिरों को निशाना बनाया।

  • सन् 1235 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के शासक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने उज्जैन पर भयानक हमला किया।

  • उसने महाकालेश्वर मंदिर को क्रूरता से ध्वस्त कर दिया। उस समय मंदिर के पुजारियों और शिवभक्तों ने मुख्य ज्योतिर्लिंग (जो वर्तमान में जूना महाकाल के नाम से जाने जाते हैं) को आक्रांताओं से बचाने के लिए मंदिर परिसर में ही स्थित ‘कोटि तीर्थ कुंड’ में विसर्जित कर दिया (या छिपा दिया)।

  • कई सौ वर्षों तक यह स्थान यूं ही खंडहर अवस्था में पड़ा रहा, लेकिन शिवभक्त गुप्त रूप से भगवान की आराधना करते रहे।

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3. मराठा साम्राज्य द्वारा पुनरुद्धार (18वीं शताब्दी)

मुगलों के पतन के बाद 18वीं शताब्दी (लगभग 1731-1734 के बीच) में मालवा पर मराठों का अधिकार हुआ। ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के संस्थापक महाराजा राणोजी राव सिंधिया (Ranoji Scindia) और उनके पेशवा मंत्री रामचंद्र बाबा शेणवी ने उज्जैन के इस पवित्र स्थल का जीर्णोद्धार करने का संकल्प लिया।

  • उन्होंने कोटि तीर्थ कुंड से शिवलिंग को बाहर निकाला।

  • जनश्रुतियों के अनुसार, मराठा शासकों ने एक नए और भव्य गर्भगृह का निर्माण कर वहां एक नया शिवलिंग स्थापित किया (जो आज मुख्य महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है)।

  • वहीं, कुंड से निकले अत्यंत प्राचीन मूल शिवलिंग को परिसर में ही पूरे विधि-विधान से स्थापित किया गया, जिसे आज ‘जूना महाकाल’ या ‘वृद्ध कालेश्वर’ के नाम से पूजा जाता है।

क्या जूना महाकाल ही असली ज्योतिर्लिंग हैं?

यह प्रश्न अक्सर उज्जैन आने वाले दर्शनार्थियों के मन में उठता है। इस विषय पर दो प्रमुख मान्यताएं हैं:

  1. ऐतिहासिक दृष्टिकोण: कई इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता यह मानते हैं कि इल्तुतमिश के हमले से पहले जो मूल महाकाल मंदिर था, उसका शिवलिंग यही जूना महाकाल है। मराठा काल में जब पुनर्निर्माण हुआ, तो मंदिर के ढांचे को विस्तार देने के लिए नए स्थान पर मुख्य ज्योतिर्लिंग की स्थापना की गई और मूल (जूना) शिवलिंग को पास ही स्थापित कर दिया गया।

  2. धार्मिक दृष्टिकोण: संतों और अखाड़ों के साधु-संन्यासियों का दृढ़ विश्वास है कि जूना महाकाल महाकाल के आदि (प्रथम) स्वरूप हैं। शिव के दोनों ही स्वरूप जाग्रत और समान रूप से फलदायी हैं। शिव तत्व एक ही है, जो भिन्न-भिन्न लिंगों में समाहित है। इसलिए शिवभक्त दोनों ही स्थानों पर समान श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।

जूना महाकाल और मुख्य महाकालेश्वर में प्रमुख अंतर

भक्तों की सुविधा के लिए हमने दोनों स्वरूपों के बीच के कुछ व्यावहारिक और पौराणिक अंतर को एक टेबल के माध्यम से दर्शाया है:

विशेषता (Features) मुख्य महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जूना महाकाल (Juna Mahakal)
प्राचीनता 18वीं सदी में वर्तमान स्थान पर पुनर्स्थापित। इसे इल्तुतमिश के हमले से पूर्व का मूल/आदि शिवलिंग माना जाता है।
स्पर्श दर्शन आम दिनों में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रहता है (केवल वीआईपी या विशिष्ट रसीद धारक)। सभी आम श्रद्धालु किसी भी समय जाकर शिवलिंग को स्पर्श कर सकते हैं।
भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध ताजी भस्म आरती तड़के 4 बजे यहीं होती है। यहां मुख्य भस्म आरती नहीं होती, लेकिन भगवान को भस्म चढ़ाई जाती है।
स्थान मंदिर के सबसे निचले तल (गर्भगृह) में स्थित। कोटि तीर्थ कुंड के समीप परिसर में स्थित।
भीड़ और वातावरण हमेशा अत्यधिक भीड़ और मंत्रोच्चार का शोर रहता है। यहां शांति रहती है, आप आराम से ध्यान लगा सकते हैं।

जूना महाकाल मंदिर में दर्शन का समय (Darshan Timings)

चूंकि जूना महाकाल मंदिर मुख्य महाकालेश्वर मंदिर परिसर की बाउंड्री के भीतर ही है, इसलिए इसके खुलने और बंद होने का समय मुख्य मंदिर के लगभग समान ही रहता है।

दर्शन/आरती समय (Timings) विवरण
मंदिर खुलने का समय सुबह 04:00 बजे मुख्य मंदिर में भस्म आरती शुरू होने के साथ ही यह परिसर भी खुल जाता है।
प्रातः अभिषेक व पूजन सुबह 05:00 – 08:00 बजे इस समय भक्त स्वयं जाकर भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक कर सकते हैं।
सामान्य दर्शन (Continuous) सुबह 04:00 से रात 11:00 बजे तक मंदिर दिन भर खुला रहता है। आप किसी भी समय दर्शन कर सकते हैं।
संध्या आरती (Evening Aarti) शाम 05:30 – 06:30 बजे के बीच डमरू, शंख और झांझ-मंजीरों के साथ बाबा की भव्य आरती होती है।
शयन आरती और कपाट बंद रात 11:00 बजे भगवान शिव को विश्राम कराने के बाद परिसर बंद कर दिया जाता है।
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(विशेष नोट: श्रावण मास, महाशिवरात्रि और सिंहस्थ कुंभ के दौरान मंदिर के समय में परिवर्तन हो सकता है, और भीड़ को देखते हुए दर्शन 24 घंटे भी चालू रह सकते हैं।)

पूजा विधि: जूना महाकाल को कैसे प्रसन्न करें?

भगवान शिव अत्यंत भोले हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी कठोर तपस्या या महंगे अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है। जूना महाकाल मंदिर में आप निम्नलिखित सरल विधि से पूजा कर सकते हैं:

  • जल और दुग्धाभिषेक: एक तांबे के पात्र (लोटे) में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल और गंगाजल मिला लें। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए जूना महाकाल पर यह जल अर्पित करें।

  • बिल्वपत्र (बेलपत्र): शिवजी को बिल्वपत्र सबसे प्रिय है। 11, 21 या 108 कटे-फटे रहित बेलपत्र लें। उनके चिकने हिस्से पर चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम’ लिखें और उल्टा करके शिवलिंग पर चढ़ाएं।

  • भस्म और चंदन: जूना महाकाल के मस्तक (शिवलिंग) पर भस्म या भभूत अर्पित करें और त्रिपुंड (तीन रेखाओं वाला चंदन) लगाएं।

  • रुद्राभिषेक: यदि आप जीवन में गंभीर संकट (जैसे कालसर्प दोष, शनि की साढ़ेसाती या स्वास्थ्य समस्याएं) का सामना कर रहे हैं, तो मंदिर के पुजारियों के माध्यम से जूना महाकाल का रुद्राभिषेक अवश्य करवाएं। इसका फल अत्यंत शीघ्र प्राप्त होता है।

मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार और उत्सव

जूना महाकाल मंदिर में साल भर कई उत्सव मनाए जाते हैं, जो भारतीय संस्कृति की अद्भुत छटा पेश करते हैं:

1. महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि

उज्जैन पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ महाशिवरात्रि से पहले ‘शिव नवरात्रि’ (9 दिनों का उत्सव) मनाई जाती है। इन नौ दिनों में भगवान महाकाल और जूना महाकाल दोनों का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में (जैसे शिव-पार्वती विवाह स्वरूप, छबीना, तांडव स्वरूप) शृंगार किया जाता है। महाशिवरात्रि की रात को यहां जागरण और चारों प्रहर की महापूजा होती है।

2. श्रावण (सावन) मास

सावन के पवित्र महीने में उज्जैन का कोना-कोना शिवमय हो जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा महाकाल की भव्य सवारी (पालकी) नगर भ्रमण के लिए निकलती है। इस दौरान जूना महाकाल मंदिर में भी विशेष कावड़ जल चढ़ाया जाता है और अखंड रुद्राभिषेक चलता है।

3. सिंहस्थ कुंभ महापर्व

हर 12 वर्ष में एक बार उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है (अगला सिंहस्थ 2028 में है)। इस दौरान लाखों नागा साधु, संत और संन्यासी जूना महाकाल के दर्शन करने आते हैं। जूना अखाड़े के साधुओं के लिए इस मंदिर का विशेष महत्व है।

महाकाल परिसर में मौजूद अन्य महत्वपूर्ण स्थान

जब आप जूना महाकाल के दर्शन करने जाएं, तो परिसर में मौजूद इन अन्य दैवीय शक्तियों के दर्शन करना न भूलें:

  • कोटि तीर्थ कुंड: जूना महाकाल के ठीक सामने स्थित यह जलकुंड बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसमें सभी तीर्थों का जल समाहित है।

  • श्री ओंकारेश्वर महादेव: मुख्य महाकाल मंदिर के ऊपर वाले तल (प्रथम मंजिल) पर भगवान ओंकारेश्वर का मंदिर है।

  • श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर: यह मंदिर सबसे ऊपरी मंजिल पर है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन (24 घंटे के लिए) ही खुलता है।

  • श्री महाकाल लोक (Corridor): हाल ही में भारत सरकार द्वारा विकसित 900 मीटर लंबा भव्य ‘महाकाल लोक’ जरूर देखें। यहां शिव पुराण की कथाओं पर आधारित 108 स्तंभ, विशाल प्रतिमाएं और मनमोहक भित्ति चित्र बनाए गए हैं। शाम के समय रंग-बिरंगी लाइटों में यह किसी देवलोक सा प्रतीत होता है।

जूना महाकाल मंदिर, उज्जैन कैसे पहुंचें? (How to Reach)

उज्जैन शहर परिवहन के मामले में बहुत सुगम है और देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

यातायात का माध्यम विवरण और जानकारी
वायु मार्ग (By Air) सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट, इंदौर (IDR) है। यह उज्जैन से लगभग 55 किमी दूर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी, कैब या वॉल्वो बस के जरिए आसानी से 1 से 1.5 घंटे में उज्जैन पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग (By Train) उज्जैन जंक्शन (UJN) देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से सीधे जुड़ा है (जैसे दिल्ली, मुंबई, भोपाल, अहमदाबाद, पुणे)। स्टेशन से महाकाल मंदिर की दूरी मात्र 1.5 से 2 किलोमीटर है। आप ऑटो या ई-रिक्शा (लगभग 50-100 रुपये) लेकर सीधे मंदिर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग (By Road) उज्जैन शानदार स्टेट और नेशनल हाईवे द्वारा जुड़ा हुआ है। इंदौर, भोपाल, कोटा, जयपुर और अहमदाबाद से नियमित एसी और नॉन-एसी बसें उज्जैन (नानाखेड़ा या देवास गेट बस स्टैंड) के लिए चलती हैं।
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यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और टिप्स (Travel Guidelines)

यदि आप उज्जैन यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. कब जाएं (Best Time to Visit): वैसे तो महाकाल नगरी में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम बहुत सुहावना होता है। गर्मियों में (मई-जून) मालवा में काफी तेज गर्मी पड़ती है।

  2. ड्रेस कोड का पालन करें: गर्भगृह में जाने (विशेषकर जल चढ़ाने) के लिए पुरुषों को धोती-सोला (बिना सिला हुआ वस्त्र) और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। जूना महाकाल में सामान्य दर्शन के लिए आप शालीन कपड़े (जैसे कुर्ता-पायजामा, सूट) पहन सकते हैं, लेकिन हाफ पैंट, शॉर्ट्स या अमर्यादित कपड़े पहनकर जाना सख्त वर्जित है।

  3. जूता स्टैंड और लॉकर: मंदिर परिसर के बाहर (महाकाल लोक के प्रवेश द्वार के पास) ही आपको अपने जूते-चप्पल, मोबाइल फोन, बैग और चमड़े का सामान (बेल्ट, पर्स) छोड़ना होगा। इसके लिए सुरक्षित और निःशुल्क लॉकर सुविधा उपलब्ध है।

  4. ठगों से सावधान रहें: पूजा या रुद्राभिषेक के लिए हमेशा मंदिर समिति द्वारा अधिकृत पुजारियों से ही संपर्क करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को पूजा के नाम पर मोटी रकम न दें।

  5. स्थानीय भोजन: उज्जैन आएं तो मालवा के प्रसिद्ध व्यंजनों— पोहा-जलेबी, दाल-बाफले और रबड़ी का स्वाद चखना न भूलें। गोपाल मंदिर के पास का बाजार इसके लिए बहुत प्रसिद्ध है।

उज्जैन केवल एक शहर नहीं है; यह एक अहसास है, एक ऊर्जा है, जो यहां आने वाले हर व्यक्ति के भीतर समा जाती है। जूना महाकाल मंदिर सनातन धर्म की उस अजेय शक्ति का प्रतीक है, जिसने आक्रांताओं की बर्बरता को झेला, नष्ट हुआ, लेकिन अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को कभी मरने नहीं दिया।

जब आप मुख्य महाकालेश्वर के दर्शन कर लेते हैं, तो बाबा की उस शाही भव्यता को देखकर मन गदगद हो जाता है। लेकिन जब आप जूना महाकाल के प्रांगण में खड़े होते हैं, तो आपको शिव के उस आदि, शांत और एकांत स्वरूप का अहसास होता है, जो सीधा आपकी आत्मा से जुड़ता है। जूना महाकाल के स्पर्श मात्र से जीवन के सारे कष्ट, तनाव और पाप धुल जाते हैं। इसलिए, अगली बार जब भी महाकाल नगरी उज्जैन पधारें, तो बाबा जूना महाकाल के दर्शन कर अपना जीवन धन्य अवश्य करें।

“जय श्री महाकाल! जय जूना महाकाल!”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: जूना महाकाल मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?

उत्तर: जूना महाकाल मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के परिसर के अंदर ही स्थित है। मुख्य गर्भगृह की ओर जाते हुए कोटि तीर्थ कुंड के पास यह प्राचीन मंदिर आता है।

प्रश्न 2: क्या जूना महाकाल ही असली महाकालेश्वर हैं?

उत्तर: ऐतिहासिक मान्यताओं और कई विद्वानों के अनुसार, 1235 ईस्वी में इल्तुतमिश के आक्रमण से पहले जूना महाकाल ही मुख्य ज्योतिर्लिंग थे, जिन्हें हमले से बचाने के लिए कुंड में छिपा दिया गया था। बाद में मराठा काल में मुख्य मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और मूल शिवलिंग (जूना महाकाल) को परिसर में स्थापित किया गया। धार्मिक रूप से दोनों ही समान रूप से जाग्रत और पूजनीय हैं।

प्रश्न 3: क्या जूना महाकाल में स्पर्श दर्शन (शिवलिंग को छूने) की अनुमति है?

उत्तर: हाँ, यही इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है। मुख्य ज्योतिर्लिंग में भीड़ के कारण आम दर्शनार्थियों को गर्भगृह में प्रवेश कम ही मिल पाता है, जबकि जूना महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालु आसानी से अंदर जाकर शिवलिंग को स्पर्श कर सकते हैं और स्वयं जलाभिषेक कर सकते हैं।

प्रश्न 4: जूना महाकाल मंदिर में दर्शन का समय क्या है?

उत्तर: जूना महाकाल मंदिर आम तौर पर सुबह 4:00 बजे (भस्म आरती के समय) खुल जाता है और रात 11:00 बजे शयन आरती के बाद बंद होता है। दिन भर भक्त सामान्य दर्शन और अभिषेक कर सकते हैं।

प्रश्न 5: क्या जूना महाकाल दर्शन के लिए अलग से कोई टिकट या पास लेना पड़ता है?

उत्तर: नहीं। जूना महाकाल मंदिर के दर्शन पूरी तरह से निःशुल्क हैं। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद, आप बिना किसी अतिरिक्त टिकट या पास के जूना महाकाल मंदिर जा सकते हैं। केवल विशेष अनुष्ठान (जैसे रुद्राभिषेक) करवाने पर ही पंडितों की दक्षिणा और सामग्री का खर्च आता है।

Amit Tiwari (Ujjain)

"नमस्कार, मेरा नाम अमित तिवारी है और मैं ujjainmahakal.co.in का संस्थापक (Founder) तथा मुख्य लेखक हूँ। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव है। इस वेबसाइट की स्थापना के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य भगवान महाकालेश्वर की महिमा, उज्जैन के प्राचीन मंदिरों और यहाँ की सनातन संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी आप सभी भक्तों तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाना है। मेरी कोशिश रहती है कि महाकाल के हर भक्त को घर बैठे यहाँ की दिव्यता और सटीक जानकारी प्राप्त हो। जय श्री महाकाल!"

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