मध्यप्रदेश की पावन और ऐतिहासिक नगरी उज्जैन को अनादि काल से ही धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष और तंत्र साधना का सबसे मुख्य केंद्र माना गया है। क्षिप्रा नदी के तट पर बसी इस नगरी को ‘अवंतिका पुरी’ भी कहा जाता है, जो भारत की सात सबसे पवित्र पुरियों (सप्त पुरियों) में से एक है। जब भी उज्जैन का नाम हमारे सामने आता है, तो सबसे पहले बाबा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भव्य छवि मन में उभरती है। लेकिन उज्जैन की यह पवित्र भूमि केवल भगवान शिव तक ही सीमित नहीं है; यह आदिशक्ति जगदंबा के विभिन्न स्वरूपों की भी परम तपस्थली है।
उज्जैन में तंत्र शास्त्र और शाक्त परंपरा (Shaktism) का एक बेहद समृद्ध और रहस्यमयी इतिहास रहा है। यहाँ स्थित माँ हरसिद्धि (51 शक्तिपीठों में से एक), माँ गढ़कालिका और माँ बगलामुखी के मंदिरों के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं, लेकिन यहाँ एक और ऐसा गुप्त और परम चमत्कारी मंदिर स्थित है, जो तंत्र साधकों और देवी भक्तों के लिए असीम श्रद्धा का केंद्र है— वह है माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (Maa Tripura Sundari Temple Ujjain)।
दश महाविद्याओं में तीसरी महाविद्या के रूप में पूजनीय ‘माँ त्रिपुरा सुंदरी’ (जिन्हें माँ ललिता, राजराजेश्वरी और षोडशी भी कहा जाता है) का यह मंदिर उज्जैन की आध्यात्मिक ऊर्जा को एक अलग ऊंचाई प्रदान करता है। यदि आप वर्ष 2026 में उज्जैन की यात्रा की योजना बना रहे हैं या माँ त्रिपुरा सुंदरी की कृपा और उनके मंदिर के इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगा।
माँ त्रिपुरा सुंदरी कौन हैं? (Who is Goddess Tripura Sundari?)
इस मंदिर के इतिहास और महत्व को समझने से पहले, हमारे लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि माँ त्रिपुरा सुंदरी का स्वरूप और उनका आध्यात्मिक अस्तित्व क्या है।
हिंदू धर्म के शाक्त संप्रदाय और तंत्र शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मांड की सर्वोच्च सत्ता को नियंत्रित करने वाली दस मुख्य देवियों को ‘दश महाविद्या’ कहा जाता है। इनमें प्रथम माँ काली, द्वितीय माँ तारा और तृतीय स्थान पर माँ त्रिपुरा सुंदरी विराजमान हैं।
नाम का अर्थ और स्वरूप
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त्रिपुरा सुंदरी: ‘त्रिपुरा’ का अर्थ है तीनों लोकों (आकाश, पाताल और पृथ्वी) या तीनों गुणों (सत्व, रज और तम) में सबसे सुंदर और शक्तिशाली। माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्य, दिव्य, तेजोमय और ममतामयी है।
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षोडशी: इन्हें ‘षोडशी’ भी कहा जाता है क्योंकि यह सदा 16 वर्ष की अत्यंत लावण्यमयी कन्या के रूप में दिखाई देती हैं, जो पूर्णता, शाश्वत यौवन और असीम ज्ञान का प्रतीक है।
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ललिता राजराजेश्वरी: माँ को ब्रह्मांड की सम्राज्ञी माना जाता है। तंत्र विज्ञान के सबसे शक्तिशाली यंत्र ‘श्री यंत्र’ (Sri Yantra) को माँ त्रिपुरा सुंदरी का ही साक्षात स्वरूप माना जाता है। माँ की साधना से साधक को भोग (सांसारिक सुख) और मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं।
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर उज्जैन का गौरवशाली इतिहास (History of the Temple)
उज्जैन के माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और यह अवंतिका नगरी के प्राचीन तांत्रिक इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है।
1. सम्राट विक्रमादित्य और तांत्रिक परंपरा
पौराणिक आख्यानों और स्थानीय इतिहास के अनुसार, उज्जैन के महान राजा सम्राट विक्रमादित्य देवियों के परम भक्त थे। उन्होंने उज्जैन की रक्षा और तंत्र साधना के संतुलन के लिए नगर के चारों कोनों और मुख्य केंद्रों पर शक्तिपीठों और महाविद्याओं की स्थापना की थी। माना जाता है कि इसी दौर में तांत्रिक अनुष्ठानों और श्री विद्या (Sri Vidya) की दीक्षा के लिए माँ त्रिपुरा सुंदरी के इस स्थान को जागृत किया गया था। यह मंदिर सदियों से गुप्त साधनाओं का एक प्रमुख केंद्र रहा है।
2. गुरु-शिष्य परंपरा और जीर्णोद्धार
समय के साथ, भारत के कई अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह यह मंदिर भी इतिहास के झंझावातों से गुजरा। मध्यकाल में विदेशी आक्रमणकारियों के समय कई सिद्ध संतों ने इस स्थान की दिव्य प्रतिमाओं और श्री यंत्र की सुरक्षा के लिए इसे बेहद गुप्त रखा। आधुनिक काल में, विभिन्न अखाड़ों के सन्यासियों, नागा साधुओं और श्री विद्या के प्रकांड विद्वानों ने इस मंदिर का पुनरुद्धार कराया। आज यह मंदिर अपने आधुनिक और भव्य स्वरूप में भक्तों का स्वागत करता है, लेकिन इसके गर्भगृह में प्रवेश करते ही सदियों पुरानी आध्यात्मिक तरंगों को आसानी से महसूस किया जा सकता है।
मंदिर की दिव्य वास्तुकला और गर्भगृह का रहस्य
उज्जैन का माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर स्थापत्य कला और आध्यात्मिक विज्ञान का एक अनूठा संगम है। मंदिर परिसर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो।
1. मुख्य गर्भगृह और माँ की दिव्य प्रतिमा
मंदिर के मुख्य गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में माँ त्रिपुरा सुंदरी की अत्यंत आकर्षक और तेजोमय प्रतिमा स्थापित है। माँ एक ऊंचे सिंहासन पर विराजमान हैं। शास्त्रों के अनुसार, माँ त्रिपुरा सुंदरी का सिंहासन भगवान ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और ईश्वर से मिलकर बना है, और सदाशिव इस सिंहासन के आधार हैं। माँ के चार हाथ हैं, जिनमें वे पाश (अंकुश), धनुष, और पुष्प बाण धारण करती हैं, जो मन, बुद्धि और पंच तत्वों के नियंत्रण का प्रतीक हैं। माँ के नेत्रों में असीम करुणा और चेहरे पर एक मंद मुस्कान है, जो भक्तों के सभी दुखों को हर लेती है।
2. साक्षात ‘श्री यंत्र’ की उपस्थिति
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित ‘श्री यंत्र’ (Sri Chakra) है। श्री यंत्र को ब्रह्मांड की उत्पत्ति और माँ ललिता महात्रिपुरा सुंदरी का साक्षात शरीर माना जाता है। मंदिर में नियमित रूप से इस श्री यंत्र का विशेष कुमकुम अर्चन और अभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि इस यंत्र के दर्शन मात्र से व्यक्ति के जीवन की दरिद्रता दूर हो जाती है और कुंडली के कई ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
3. अन्य देवी-देवताओं के विग्रह
मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में भगवान शिव (चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में), भगवान गणेश, कार्तिकेय और साक्षात भैरव देव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। तंत्र शास्त्र के नियमानुसार, किसी भी महाविद्या के मंदिर की रक्षा के लिए भैरव जी की उपस्थिति अनिवार्य होती है। यहाँ आने वाले भक्त माँ के दर्शन के बाद भैरव बाबा के दर्शन अवश्य करते हैं ताकि उनकी पूजा पूर्ण मानी जा सके।
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में तंत्र और साधना का महत्व
उज्जैन को ‘तांत्रिकों का गढ़’ कहा जाता है। यहाँ चक्रतीर्थ, ओखलेश्वर श्मशान और काल भैरव जैसे अति-जागृत तांत्रिक स्थल हैं। इस पृष्ठभूमि में, माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
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श्री विद्या साधना का केंद्र: भारत भर से जो साधक ‘श्री विद्या’ की कठिन साधना करना चाहते हैं, वे उज्जैन के इस शांत और जागृत मंदिर में आकर मंत्र जाप करते हैं।
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गुप्त नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान: वर्ष में दो मुख्य नवरात्रियों (चैत्र और शारदीय) के अलावा, दो ‘गुप्त नवरात्रि’ (माघ और आषाढ़ महीने में) भी आती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में आम भक्तों की तुलना में तांत्रिकों और अघोरियों की संख्या बढ़ जाती है। इन दिनों में यहाँ मध्यरात्रि में गुप्त हवन और साधनाएं की जाती हैं।
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मनोकामना पूर्ति और रक्षा कवच: आम गृहस्थ भक्तों के लिए मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति जीवन में अत्यधिक कर्ज, अदालती मामलों, गंभीर बीमारियों या व्यापार में भारी नुकसान से जूझ रहा है, तो वह यहाँ आकर माँ के चरणों में लाल गुलाब के फूल और शृंगार सामग्री अर्पित करे, तो उसकी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।
दर्शन का समय और दैनिक दिनचर्या (Maa Tripura Sundari Temple Ujjain Timings)
यदि आप मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो आपको मंदिर के खुलने, बंद होने और आरती के सटीक समय की जानकारी होनी चाहिए ताकि आप माँ की दिव्य आरती का लाभ उठा सकें।
दैनिक दर्शन और आरती समय सारणी
| कार्यक्रम / अनुष्ठान (Ritual) | समय (Timings) | महत्व और विवरण (Details) |
| मंदिर के कपाट खुलना | सुबह 5:30 बजे | ब्रह्म मुहूर्त के बाद मंदिर की सफाई और गर्भगृह को शुद्ध किया जाता है। |
| मंगला आरती / प्रथम पूजा | सुबह 6:00 बजे | माँ का सुबह का जागरण और संक्षिप्त आरती। |
| महा-अभिषेक एवं शृंगार | सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक | इस दौरान माँ की प्रतिमा और श्री यंत्र का दूध, जल और पंचामृत से अभिषेक कर भव्य शृंगार किया जाता है। |
| राजभोग और दोपहर की आरती | दोपहर 12:00 बजे | माँ को सात्विक भोजन (भोग) लगाया जाता है और दोपहर की आरती होती है। |
| पट बंद होने का समय (विश्राम) | दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक | दोपहर के समय देवी के विश्राम के लिए कपाट बंद रहते हैं। |
| शाम को पुनः खुलना | शाम 4:00 बजे | शाम के दर्शनों के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। |
| संध्या महाआरती | शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे तक | यह मंदिर का सबसे भव्य समय होता है। शंखनाद, नगाड़ों और कपूर की दिव्य लौ के साथ महाआरती होती है। |
| शयन आरती और कपाट बंद | रात 9:30 बजे | माँ की अंतिम आरती के बाद मंदिर के कपाट रात के लिए बंद कर दिए जाते हैं। |
विशेष नोट: शुक्रवार और पूर्णिमा (Full Moon Day) के दिन माँ त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन का विशेष महत्व होता है। इन दिनों में भक्तों की भारी भीड़ के कारण दर्शन के समय में थोड़ा विस्तार किया जा सकता है।
मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार और उत्सव
उज्जैन के इस शक्तिपीठ में पूरे वर्ष कई धार्मिक उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं, लेकिन कुछ त्योहार ऐसे हैं जब मंदिर की छटा देखते ही बनती है:
1. शारदीय और चैत्र नवरात्रि (Navratri Festival)
नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर को गेंदे के फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और सुंदर झंडियों से सजाया जाता है। इन नौ दिनों में रोज माँ का एक नया और अलौकिक शृंगार किया जाता है। अष्टमी और नवमी तिथि को मंदिर परिसर में एक विशाल ‘शतचंडी महायज्ञ’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें आहुति देने से अमोघ फलों की प्राप्ति होती है।
2. त्रिपुरा पूर्णिमा (Tripura Purnima / Kartik Purnima)
कार्तिक मास की पूर्णिमा को ‘त्रिपुरा पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के भयानक राक्षस का वध किया था, जिसमें माँ त्रिपुरा सुंदरी की शक्ति समाहित थी। इस दिन पूरे मंदिर परिसर को हजारों दीपकों से रोशन किया जाता है (देव दीपावली) और माँ को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है।
3. ललिता पंचमी (Lalita Panchami)
शारदीय नवरात्रि की पंचमी तिथि को ‘ललिता पंचमी’ कहा जाता है। यह दिन पूरी तरह से माँ ललिता त्रिपुरा सुंदरी को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए सामूहिक पूजन और ललिता सहस्रनाम का पाठ आयोजित किया जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक गाइडलाइन: क्या करें और क्या न करें?
एक जागृत तांत्रिक और आध्यात्मिक क्षेत्र होने के नाते, माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के अपने कुछ नियम और मर्यादाएं हैं, जिनका पालन हर यात्री को करना चाहिए:
क्या करें (Do’s)
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पारंपरिक वस्त्र पहनें: मंदिर में प्रवेश करते समय पुरुषों को धोती-कुर्ता या पैंट-शर्ट और महिलाओं को साड़ी या सलवार-सूट जैसे शालीन कपड़े पहनने चाहिए।
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शृंगार सामग्री अर्पित करें: माँ को खुश करने के लिए अपने साथ लाल चुनरी, नारियल, कुमकुम, इत्र और लाल गुलाब के फूल अवश्य लेकर जाएं।
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श्री यंत्र के सामने ध्यान लगाएं: दर्शन के बाद मंदिर परिसर में कुछ मिनट शांति से बैठकर ‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदर्यै नमः’ मंत्र का मानसिक जाप करें।
क्या न करें (Don’ts)
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गर्भगृह में फोटोग्राफी वर्जित है: माँ की मुख्य प्रतिमा और श्री यंत्र की तस्वीरें या वीडियो खींचना सख्त मना है। कैमरे और मोबाइल का उपयोग केवल बाहरी परिसर तक ही सीमित रखें।
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चमड़े की वस्तुओं से बचें: मंदिर के अंदर जाते समय चमड़े का बेल्ट, पर्स या जैकेट बाहर ही उतार दें या उन्हें अपने बैग में रख लें।
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मासिक धर्म के नियम: सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर उज्जैन कैसे पहुँचें? (How to Reach)
उज्जैन शहर परिवहन के सभी माध्यमों से भारत के कोने-कोने से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप अपनी सुविधा के अनुसार निम्नलिखित तरीकों से यहाँ पहुँच सकते हैं:
1. रेल मार्ग द्वारा (By Train) – सबसे आसान तरीका
उज्जैन जंक्शन (Ujjain Junction – UJN) एक बहुत बड़ा रेलवे स्टेशन है। यहाँ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, अहमदाबाद और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनें आती हैं। रेलवे स्टेशन से माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की दूरी लगभग 3 से 4 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से आपको आसानी से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा या टैक्सी मिल जाएगी।
2. हवाई मार्ग द्वारा (By Air)
उज्जैन शहर का अपना कोई कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंदौर (IDR) है, जो उज्जैन से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर एयरपोर्ट पर भारत के सभी प्रमुख शहरों से उड़ानें संचालित होती हैं। एयरपोर्ट से आप सीधे उज्जैन के लिए प्राइवेट कैब (टैक्सी) किराए पर ले सकते हैं, जो आपको 1 से 1.5 घंटे में उज्जैन पहुंचा देगी। इसके अलावा इंदौर से उज्जैन के लिए हर 10 मिनट में लग्जरी बसें भी चलती हैं।
3. सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
मध्यप्रदेश और आस-पास के राज्यों (जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र) के प्रमुख शहरों से उज्जैन के लिए सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं। इंदौर-उज्जैन फोरलेन हाईवे बेहद शानदार है, जिससे आप अपनी निजी कार या बाइक से भी बेहद आरामदायक सफर तय कर सकते हैं।
स्थानीय परिवहन (Local Transport in Ujjain)
उज्जैन शहर के भीतर घूमने के लिए सबसे अच्छा और सस्ता साधन ई-रिक्शा (E-Rickshaw) है। यह पर्यावरण के अनुकूल है और तंग गलियों में भी आसानी से चला जाता है। आप चाहें तो पूरे दिन के लिए ऑटो या बाइक भी किराए पर ले सकते हैं।
उज्जैन के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)
यदि आप माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं, तो आपको अपनी यात्रा की योजना में उज्जैन के इन अन्य विश्व प्रसिद्ध मंदिरों को भी अवश्य शामिल करना चाहिए:
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श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, जो अपनी अलौकिक ‘भस्म आरती’ के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
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माँ हरसिद्धि मंदिर: महाकाल मंदिर के पास ही स्थित यह मंदिर राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी का है और यहाँ शाम को जलने वाले दीप स्तंभों का नजारा अद्भुत होता है।
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काल भैरव मंदिर: जहाँ भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को साक्षात मदिरा का भोग लगाया जाता है।
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मंगलनाथ मंदिर: इस स्थान को पूरी पृथ्वी का केंद्र बिंदु (Center of Earth) माना जाता है और यह मंगल दोष निवारण पूजा के लिए प्रसिद्ध है।
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सांदीपनि आश्रम: वह पवित्र स्थान जहाँ द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण, बलराम और उनके मित्र सुदामा ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी।
उज्जैन की पावन धरा पर स्थित Maa Tripura Sundari Temple Ujjain केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह असीम ब्रह्मांडीय ऊर्जा, शांति और आदि शक्ति की ममता का जीवंत प्रतीक है। महाकाल की इस नगरी में जहाँ एक ओर वैराग्य और भस्म का संदेश मिलता है, वहीं माँ त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में जीवन की पूर्णता, सुंदरता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चाहे आप एक आम श्रद्धालु हों जो मानसिक तनाव से मुक्ति की तलाश में हैं, या एक गंभीर साधक जो श्री विद्या के रहस्यों को समझना चाहते हैं— माँ त्रिपुरा सुंदरी का यह मंदिर हर किसी की झोली को खुशियों से भर देता है। वर्ष 2026 में अपनी उज्जैन यात्रा के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन करने के साथ-साथ कुछ समय निकालकर इस शांत और चमत्कारी मंदिर में अवश्य बिताएं। माँ ललिता राजराजेश्वरी आपकी यात्रा को सफल और मंगलमय बनाएँगी। जय माँ त्रिपुरा सुंदरी!
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर उज्जैन – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. माँ त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?
माँ त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर उज्जैन के प्राचीन और मुख्य शहरी क्षेत्र में स्थित है। यह महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के प्रमुख घाटों से ज्यादा दूर नहीं है। आप स्थानीय ई-रिक्शा या ऑटो वाले को बोलकर बहुत ही आसानी से इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
2. क्या माँ त्रिपुरा सुंदरी और माँ ललिता एक ही हैं?
जी हाँ, माँ त्रिपुरा सुंदरी, माँ ललिता, माँ षोडशी और माँ राजराजेश्वरी— ये सभी एक ही परम सत्ता के विभिन्न नाम हैं। वह दश महाविद्याओं में तीसरी महाविद्या हैं और उन्हें सौंदर्य, ज्ञान और ब्रह्मांड की सम्राज्ञी के रूप में पूजा जाता है।
3. क्या इस मंदिर में जाने के लिए कोई विशेष पास या ऑनलाइन बुकिंग करानी पड़ती है?
नहीं, माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में सामान्य दर्शनों के लिए किसी भी प्रकार के ऑनलाइन पास, टिकट या एडवांस बुकिंग की आवश्यकता नहीं होती है। भक्त सीधे मंदिर परिसर में जाकर कतार में लगकर माँ के दर्शन निःशुल्क कर सकते हैं। केवल विशेष त्योहारों या नवरात्रों में भीड़ के कारण थोड़ा समय लग सकता है।
4. इस मंदिर में माँ को क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
माँ त्रिपुरा सुंदरी को शृंगार की वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। भक्त मुख्य रूप से माँ को लाल रंग की चुनरी, नारियल, कुमकुम, इत्र, मिश्री, मखाने और लाल गुलाब या गुड़हल के फूल अर्पित करते हैं। मंदिर के बाहर स्थित दुकानों से आप यह पूजा सामग्री आसानी से खरीद सकते हैं।
5. क्या गृहस्थ लोग भी माँ त्रिपुरा सुंदरी (श्री विद्या) की पूजा कर सकते हैं?
हाँ, गृहस्थ लोग पूरी तरह से माँ त्रिपुरा सुंदरी की भक्ति और सामान्य पूजा कर सकते हैं। माँ का स्वरूप अत्यंत दयालु और ममतामयी है, इसलिए उनकी सामान्य भक्ति, चालीसा पाठ या नाम जप के लिए किसी कठिन नियम की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, उच्च स्तरीय ‘श्री विद्या तंत्र साधना’ या ‘दीक्षा’ के लिए एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य माना जाता है।