भारत की मोक्षदायिनी और तंत्र साधना की सर्वोच्च नगरी ‘उज्जैन’ (अवंतिका) में पग-पग पर देवी-देवताओं और सिद्ध योगियों का वास है। जब भी उज्जैन में शक्ति उपासना या माता बगलामुखी की बात आती है, तो अधिकांश लोगों का ध्यान उज्जैन से 100 किलोमीटर दूर स्थित नलखेड़ा मंदिर की ओर जाता है। लेकिन, उज्जैन शहर की सीमा के भीतर ही, महाकाल की इस पावन भूमि पर एक ऐसा अत्यंत जाग्रत, सिद्ध और चमत्कारी शक्तिपीठ मौजूद है, जो तांत्रिक साधनाओं और अमोघ अनुष्ठानों के लिए पूरे भारत में तेजी से विख्यात हो रहा है—मां बगलामुखी धाम (अमोदिया), उज्जैन [Maa Baglamukhi Dham (Amodiya) Ujjain]।
उज्जैन के प्रसिद्ध भैरवगढ़ और मंगलनाथ मार्ग के समीप ‘अमोदिया’ (Amodiya) क्षेत्र में स्थित यह धाम केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह नाथ संप्रदाय के सिद्ध योगियों, दस महाविद्याओं और असीम आध्यात्मिक ऊर्जा का एक जाग्रत केंद्र है। वर्तमान समय में, महंत 1008 पीर योगी राम नाथ महाराज के सानिध्य में यह धाम उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक ‘संजीवनी’ बन चुका है, जो जीवन में शत्रुओं, कोर्ट-कचहरी के झूठे मुकदमों, काले जादू (Black Magic) या भयंकर संकटों से घिरे हुए हैं।
वर्ष 2026 में, जहाँ उज्जैन ‘महाकाल महालोक’ के कारण आध्यात्मिक पर्यटन के चरम पर है, वहीं अमोदिया स्थित यह बगलामुखी धाम वीआईपी (VIPs), राजनेताओं, उद्योगपतियों और आम श्रद्धालुओं के लिए अनुष्ठान का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
इस अत्यंत विस्तृत, शोधपूर्ण और संपूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) में हम ‘मां बगलामुखी धाम (अमोदिया)’ के इतिहास, श्री मलंगनाथ सरकार की समाधि, परिसर में विराजमान अन्य देवों (जैसे मां प्रत्यंगिरा), मिर्ची हवन के तांत्रिक रहस्य, दर्शन और आरती के समय, और आपकी उज्जैन यात्रा को सुगम बनाने वाली हर छोटी-बड़ी जानकारी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. मां बगलामुखी धाम (अमोदिया) का परिचय और महत्व
उज्जैन के अमोदिया क्षेत्र में स्थित ‘मां बगलामुखी धाम’ एक ऐसा विशाल और सिद्ध आध्यात्मिक परिसर है, जहाँ पहुंचते ही साधक को एक अलौकिक शांति और असीम ऊर्जा का अनुभव होता है।
यह धाम इसलिए भी अद्वितीय है क्योंकि यहाँ केवल माता बगलामुखी ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म के कई अत्यंत जाग्रत और उग्र देवी-देवता एक ही परिसर में विराजमान हैं। जब व्यक्ति जीवन के हर मार्ग से निराश हो जाता है और संसार की कोई भी अदालत उसे न्याय नहीं दे पाती, तब वह अमोदिया के इस सिद्ध धाम में आकर माता पीताम्बरा (बगलामुखी) के दरबार में अपनी अर्जी लगाता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से किया गया हवन या अनुष्ठान कभी खाली नहीं जाता और साधक को तत्काल फल (Instant Results) प्राप्त होता है।
दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति: मां बगलामुखी
सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र में ‘दस महाविद्याओं’ का सर्वोच्च स्थान है, जिनमें 8वीं महाविद्या ‘माता बगलामुखी’ हैं। माता बगलामुखी को ‘शत्रु नाशिनी’ (शत्रुओं का नाश करने वाली) और ‘स्तम्भन की देवी’ (शत्रु की वाणी, गति और बुद्धि को रोकने वाली) कहा जाता है।
उनका स्वरूप अत्यंत तेजोमय है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और उनके एक हाथ में गदा है जिससे वे शत्रु पर प्रहार करती हैं, और दूसरे हाथ से उन्होंने शत्रु (महासुर) की जीभ पकड़ रखी है। माता के इसी स्वरूप की पूजा अमोदिया धाम में अत्यंत भव्य रूप में की जाती है।
2. धाम का इतिहास, नाथ संप्रदाय और श्री मलंगनाथ सरकार की समाधि
मां बगलामुखी धाम (अमोदिया) का इतिहास और इसकी असीम ऊर्जा का रहस्य ‘नाथ संप्रदाय’ (Nath Sampradaya) की योग परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
श्री मलंगनाथ सरकार की समाधि
भारत में नाथ संप्रदाय (नवनाथ परंपरा) के सिद्ध योगियों ने तंत्र और योग साधना के माध्यम से असीम सिद्धियां प्राप्त की थीं। अमोदिया धाम के इसी पवित्र परिसर में ‘श्री मलंगनाथ सरकार की समाधि’ (Shree Malangnath Sarkar Samadhi Sthal) स्थित है। श्री मलंगनाथ सरकार एक अत्यंत उच्च कोटि के सिद्ध नाथ योगी थे, जिन्होंने इसी भूमि पर कठोर तपस्या की थी। आज भी उनकी समाधि से एक विशेष प्रकार की अलौकिक ऊर्जा प्रवाहित होती है। दर्शनार्थियों के लिए माता बगलामुखी के दर्शन से पूर्व या पश्चात इस सिद्ध समाधि पर शीश झुकाना अनिवार्य और अत्यंत फलदायी माना जाता है।
महंत 1008 पीर योगी राम नाथ महाराज का सानिध्य
वर्तमान में इस संपूर्ण धाम का संचालन, विकास और यहाँ होने वाले सभी तांत्रिक अनुष्ठान महंत 1008 पीर योगी राम नाथ महाराज के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न होते हैं। योगी राम नाथ महाराज ने इस धाम को केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि दीन-दुखियों के संकट दूर करने वाले एक ‘जाग्रत न्यायालय’ के रूप में स्थापित किया है। उनके निर्देशन में यहाँ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वैदिक और तांत्रिक मंत्रों के माध्यम से दोष निवारण और हवन संपन्न कराए जाते हैं।
3. एक अद्वितीय परिसर: जहाँ विराजमान हैं अनेक जाग्रत देव
अमोदिया स्थित मां बगलामुखी धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भक्तों को एक ही परिसर में कई प्रमुख देवी-देवताओं के दर्शन और उनके अनुष्ठान का पुण्य लाभ मिलता है। यहाँ विराजमान प्रमुख देव इस प्रकार हैं:
1. मां प्रत्यंगिरा जी (Maa Pratyangira)
यह इस धाम का एक अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी आकर्षण है। मां प्रत्यंगिरा का मंदिर उत्तर भारत में बहुत कम देखने को मिलता है। मां प्रत्यंगिरा का स्वरूप आधा शेर (Lion) और आधा मनुष्य (Woman) का है। अथर्ववेद और तंत्र शास्त्र के अनुसार, काले जादू (Black Magic), बुरी नजर और प्राणघातक तांत्रिक प्रयोगों (Abhichara) को काटने और वापस उसी व्यक्ति पर पलटने (Reverse) की सबसे बड़ी शक्ति मां प्रत्यंगिरा के पास है। यहाँ मां बगलामुखी और मां प्रत्यंगिरा का एक साथ होना इस धाम को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
2. स्फटिक शिवलिंग (Sphatik Shivling)
धाम के गर्भगृह में एक अत्यंत दुर्लभ और पारदर्शी ‘स्फटिक शिवलिंग’ स्थापित है। स्फटिक (Crystal) को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और यह ऊर्जा का सबसे बड़ा सुचालक (Amplifier) है। स्फटिक शिवलिंग पर किया गया रुद्राभिषेक तुरंत फलदायी होता है और साधक के घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
3. श्री महाबली काल भैरव और महावीर हनुमान
तंत्र साधना में शक्ति (देवी) के साथ भैरव और हनुमान की उपस्थिति अनिवार्य है। इस परिसर में उज्जैन के सेनापति श्री महाबली काल भैरव जी और श्री महावीर हनुमान जी का अत्यंत जाग्रत मंदिर है। किसी भी तांत्रिक अनुष्ठान (हवन) से पहले इन रक्षक देवताओं की आज्ञा ली जाती है।
4. श्री खाटूश्याम बाबा और नवग्रह (Khatushyam Baba & Navgrah)
कलयुग के अवतारी देवता ‘हारे के सहारे’ श्री खाटूश्याम बाबा का सुंदर दरबार भी इस धाम में मौजूद है। इसके साथ ही नवनाथ, नवदुर्गा, नवग्रह और न्याय के देवता श्री शनिदेव का मंदिर भी इसी परिसर में स्थापित है, जहाँ श्रद्धालु अपने ग्रह दोषों की शांति के लिए तेल का अभिषेक करते हैं।
4. तांत्रिक अनुष्ठान: प्रसिद्ध ‘मिर्ची हवन’ और इसके चमत्कार (The Secret of Mirchi Havan)
अमोदिया धाम की विश्वव्यापी ख्याति का सबसे बड़ा कारण यहाँ होने वाले अमोघ तांत्रिक अनुष्ठान (Havan) हैं। राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, और बड़े व्यापारियों द्वारा यहाँ सफलता और सुरक्षा के लिए गुप्त रूप से हवन कराए जाते हैं।
यहाँ माता बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से दो प्रकार के हवन होते हैं:
1. पीली सरसों का सात्विक-राजसिक हवन
माता को ‘पीताम्बरा’ (पीले रंग से प्रेम करने वाली) कहा जाता है।
-
उद्देश्य: व्यापार में वृद्धि, पारिवारिक कलह से मुक्ति, और जीवन में स्थिरता प्राप्त करने के लिए यह हवन किया जाता है।
-
सामग्री: इसमें पीली सरसों, हल्दी की गांठ, और पीले पुष्पों की आहुति दी जाती है।
-
परिणाम: यह साधक के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा (Aura) बना देता है, जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति उसे छू नहीं पाती।
2. लाल मिर्ची का उग्र तांत्रिक हवन (Red Chili Havan)
यह मां बगलामुखी का सबसे उग्र, शक्तिशाली और तत्काल फल देने वाला अनुष्ठान है।
-
कब किया जाता है? जब कोई बहुत शक्तिशाली शत्रु आपके प्राणों, संपत्ति या सम्मान के पीछे पड़ा हो, जब कोर्ट-कचहरी का फैसला आपके खिलाफ जा रहा हो, या जब चुनाव (Elections) में किसी बड़े प्रतिद्वंद्वी को हराना हो।
-
हवन की विधि: इस हवन में साबुत लाल खड़ी मिर्च (जिसमें डंठल लगा हो) का उपयोग किया जाता है। लाल मिर्च को सरसों के तेल में डुबोकर, बगलामुखी और प्रत्यंगिरा मंत्रों के उग्र उच्चारण के साथ धधकती अग्नि में आहुति दी जाती है।
-
सबसे बड़ा चमत्कार: इस हवन का सबसे बड़ा अलौकिक चमत्कार यह है कि जब इतनी भारी मात्रा में लाल मिर्च आग में जलाई जाती है, तो हवन कुंड से बिल्कुल भी धुआं (Smoke) या मिर्च की धास (तीखापन) नहीं उठती, जिससे किसी की आंखों में जलन हो। यह इस बात का साक्षात प्रमाण है कि माता बगलामुखी उस आहुति को प्रत्यक्ष रूप से ग्रहण कर रही हैं।
-
स्तम्भन प्रभाव: मिर्ची हवन करने से शत्रु की ‘बुद्धि भ्रष्ट’ हो जाती है, उसकी वाणी बंद (स्तम्भित) हो जाती है और वह साधक के सामने हार मान लेता है।
5. चमत्कारों का साक्ष्य: स्वर्ण मुकुट का गुप्त दान (Miracles and Devotion)
अमोदिया स्थित मां बगलामुखी धाम में माता के चमत्कार कितने त्वरित (Fast) और प्रभावशाली हैं, इसका प्रमाण यहाँ आए दिन देखने को मिलता है।
हाल ही की एक घटना (वर्ष 2025/2026) ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस धाम की ओर आकर्षित किया। नवरात्रि के पावन पर्व पर, एक श्रद्धालु ने अपनी अत्यंत कठिन मनोकामना पूरी होने पर मां बगलामुखी को गुप्त दान के रूप में 500 ग्राम (आधा किलो) सोने का मुकुट भेंट किया।
महंत 1008 पीर योगी राम नाथ महाराज ने इस गुप्त दान की जानकारी साझा करते हुए बताया कि माता के दरबार में जब कोई भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी अर्जी लगाता है, तो माता उसकी रक्षा स्वयं करती हैं। जब इच्छाएं पूर्ण होती हैं, तो भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता को विभिन्न वस्तुएं अर्पित करते हैं। आधा किलो सोने का यह मुकुट अब मंदिर में माता की तेजोमय प्रतिमा पर विराजमान है, जो माता की अपार महिमा का जीता-जागता साक्ष्य है।
6. किन संकटों में अमोदिया धाम आना चाहिए? (When to Visit?)
यद्यपि माता का दरबार हर श्रद्धालु के लिए खुला है, लेकिन तंत्र शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में अमोदिया धाम आकर मां बगलामुखी और मां प्रत्यंगिरा की शरण लेना अनिवार्य हो जाता है:
-
कोर्ट केस (Legal Disputes): यदि आप किसी झूठे मुकदमे में फंसा दिए गए हैं, या वर्षों से कोई प्रॉपर्टी विवाद नहीं सुलझ रहा है, तो यहाँ अनुष्ठान करने से फैसला आपके पक्ष में आता है।
-
काले जादू और ऊपरी हवा से मुक्ति (Black Magic): यदि आपके घर में अचानक सब कुछ बर्बाद होने लगा है, अकारण बीमारियां आ रही हैं, तो मां प्रत्यंगिरा और बगलामुखी के संयुक्त हवन से उस तंत्र-मंत्र को काटा जा सकता है।
-
राजनीतिक विजय (Political Success): चुनाव में विजय प्राप्त करने और विरोधियों के षड्यंत्र को विफल करने के लिए राजनेता यहाँ विशेष अनुष्ठान करवाते हैं।
-
शत्रु बाधा (Enemy Suppression): जब अज्ञात और ज्ञात शत्रु आपको मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हों, तो माता का ‘स्तम्भन मंत्र’ शत्रुओं की गति को रोक देता है।
-
व्यापारिक रुकावट (Business Growth): व्यापार में बार-बार घाटा हो रहा हो, तो स्फटिक शिवलिंग का रुद्राभिषेक और पीली सरसों का हवन चमत्कारिक लाभ देता है।
7. मां बगलामुखी धाम (अमोदिया): दर्शन और आरती का समय (Timings in 2026)
भक्तों की सुविधा के लिए धाम का प्रशासन बहुत ही सुव्यवस्थित है। यदि आप अमोदिया धाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित समय सारिणी का ध्यान रखें:
धाम खुलने और बंद होने का समय:
-
प्रातः काल (Morning): सुबह 05:30 बजे
-
रात्रि बंदी (Night): रात 09:30 बजे तक
-
(विशेष तांत्रिक अनुष्ठान, नवरात्रि और चतुर्दशी की रातों में यहाँ 24 घंटे हवन और पूजा-पाठ चलता रहता है)।
प्रतिदिन आरती की समय सारणी (Aarti Schedule)
| आरती का प्रकार | समय (Timings) | विशेष विवरण |
| मंगला आरती | सुबह 06:00 से 06:30 बजे | माता को जगाने और प्रथम दर्शन की आरती। |
| राजभोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | माता को पीले व्यंजनों का मुख्य भोग अर्पित किया जाता है। |
| संध्या आरती | शाम 07:00 से 07:45 बजे | सूर्यास्त के समय शंख और डमरुओं के साथ होने वाली भव्य आरती। |
| शयन आरती | रात 09:00 बजे | विश्राम से पूर्व की अंतिम आरती। |
8. उज्जैन: अमोदिया धाम कैसे पहुँचें? (How to Reach Amodiya, Ujjain)
मां बगलामुखी धाम, उज्जैन शहर के अमोदिया (भैरवगढ़ और मंगलनाथ मार्ग के समीप) क्षेत्र में स्थित है। यह महाकाल मंदिर और रेलवे स्टेशन से बहुत ही सुगम दूरी पर है।
1. हवाई मार्ग (By Air)
उज्जैन का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय विमानतल’ (DABH) है। इंदौर से उज्जैन की दूरी लगभग 55 किमी है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी बुक करके सीधे अमोदिया (उज्जैन) पहुँच सकते हैं।
2. रेल मार्ग (By Train)
उज्जैन जंक्शन (UJN) रेलवे स्टेशन भारत के सभी प्रमुख शहरों (दिल्ली, मुंबई, गुजरात) से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
-
रेलवे स्टेशन से दूरी: उज्जैन रेलवे स्टेशन से अमोदिया स्थित मां बगलामुखी धाम की दूरी लगभग 6 से 7 किलोमीटर है।
3. स्थानीय यातायात (Local Transport in 2026)
-
ई-रिक्शा और ऑटो (E-Rickshaw/Auto): उज्जैन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या महाकालेश्वर मंदिर से आप बहुत ही आसानी से ई-रिक्शा या ऑटो रिजर्व करके अमोदिया धाम पहुँच सकते हैं। ई-रिक्शा वाले इस सिद्ध स्थान से भली-भांति परिचित हैं।
-
रूट प्लान: यह धाम मंगलनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर वाले रूट (भैरवगढ़ क्षेत्र) के समीप ही पड़ता है। अतः आप अपनी यात्रा इस प्रकार प्लान कर सकते हैं कि एक ही रूट पर काल भैरव, मंगलनाथ, सिद्धवट और मां बगलामुखी धाम के दर्शन हो जाएं।
-
पार्किंग: धाम के बाहर चार-पहिया वाहनों (Cars/SUVs) को पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है।
9. हवन और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं हेतु नियम और सावधानियां (Rules & Tips)
एक तांत्रिक शक्तिपीठ और नाथ संप्रदाय का आश्रम होने के नाते, अमोदिया धाम में कुछ सख्त नियम हैं, जिनका पालन हर श्रद्धालु को करना अनिवार्य है:
-
ड्रेस कोड (Dress Code): माता के दरबार में शालीन और मर्यादित कपड़े पहनकर जाएं। यदि आप हवन या अनुष्ठान में बैठ रहे हैं, तो पीले वस्त्र (पुरुषों के लिए पीली धोती/कुर्ता और महिलाओं के लिए पीली साड़ी/सूट) पहनना अनिवार्य है। यह वस्त्र धाम के बाहर या उज्जैन बाजार से आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।
-
मांस-मदिरा सख्त वर्जित: यद्यपि यह एक तांत्रिक पीठ है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में या इसके आस-पास मांस (Non-veg) या मदिरा (Alcohol) का सेवन करके आना घोर पाप माना जाता है। माता की पूजा पूर्ण सात्विकता और शुद्धता के साथ की जाती है।
-
दलालों से बचें: अमोदिया धाम में किसी भी प्रकार के अनुष्ठान या मिर्ची हवन के लिए किसी बाहरी दलाल (Agent) या ऑटो वाले के झांसे में न आएं। सीधे धाम परिसर में स्थित कार्यालय (Office) में जाएं और वहां के अधिकृत आचार्यों और पुजारियों से मिलकर ही अपना अनुष्ठान बुक करें।
-
स्वच्छता और शांति: श्री मलंगनाथ सरकार की समाधि और स्फटिक शिवलिंग के समीप पूर्ण शांति बनाए रखें। मोबाइल फोन का उपयोग कम से कम करें और फोटोग्राफी करते समय गर्भगृह के नियमों का उल्लंघन न करें।
-
हवन का संकल्प: यदि आप किसी विशेष उद्देश्य से मिर्ची हवन कर रहे हैं, तो आपके मन में सत्य और धर्म होना चाहिए। किसी निर्दोष व्यक्ति का बुरा करने (प्रतिशोध) के लिए किया गया हवन कभी फलित नहीं होता, बल्कि उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
10. अमोदिया धाम के आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)
अपनी अमोदिया यात्रा के दौरान, आप उज्जैन के इस आध्यात्मिक सर्किट के अन्य जाग्रत तीर्थों के दर्शन भी कर सकते हैं, जो यहाँ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं:
-
श्री मंगलनाथ मंदिर (Mangalnath Mandir): अमोदिया मार्ग के समीप ही मंगल ग्रह की जन्मभूमि और कर्क रेखा का केंद्र स्थित है। यहाँ भात पूजा की जाती है।
-
श्री काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav): उज्जैन के कोतवाल का मंदिर, जहाँ भगवान साक्षात मदिरा का भोग ग्रहण करते हैं।
-
सिद्धवट (Siddhavat): क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित वह अमर वटवृक्ष जहाँ पितृ तर्पण और कालसर्प दोष की पूजा होती है।
-
भर्तृहरि गुफाएं (Bhartrihari Caves): महान विद्वान राजा भर्तृहरि की प्राचीन तपोभूमि।
-
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: उज्जैन का हृदय और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक (अमोदिया से लगभग 7 किमी दूर)।
उज्जैन के अमोदिया क्षेत्र में स्थित मां बगलामुखी धाम केवल ईंट और पत्थरों से बना एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की उस असीम शक्ति, न्याय व्यवस्था और नाथ संप्रदाय की योग साधना का एक जाग्रत प्रमाण है। जहाँ आधुनिक युग का विज्ञान समाप्त हो जाता है, वहाँ माता पीताम्बरा (बगलामुखी) और मां प्रत्यंगिरा के चमत्कार शुरू होते हैं।
महंत 1008 पीर योगी राम नाथ महाराज के तप और मार्गदर्शन में, यह धाम आज उन लाखों निराश और पराजित लोगों के लिए एक सुरक्षित दुर्ग (Fortress) बन गया है, जिन्हें संसार में कहीं न्याय नहीं मिला। जब कोई भक्त पीले वस्त्र धारण कर, पूर्ण श्रद्धा और आंखों में आंसू लेकर इस धाम के हवन कुंड में पीली सरसों या लाल मिर्च की आहुति देता है, तो माता उसकी हर विपत्ति को उसी अग्नि में भस्म कर देती हैं।
हाल ही में माता को अर्पित किया गया 500 ग्राम सोने का मुकुट इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कलियुग में भी माता की शक्तियां उतनी ही जाग्रत और त्वरित (Fast) हैं, जितनी सतयुग में थीं।
यदि आपके जीवन में भी कोई ऐसा अवरोध है जो आपके विकास को रोक रहा है, कोई ऐसा शत्रु है जो आपको मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है, या कोई ऐसा कोर्ट केस है जो आपको रातों को सोने नहीं दे रहा, तो एक बार उज्जैन के अमोदिया स्थित इस सिद्ध बगलामुखी धाम में अवश्य आएं। मां बगलामुखी, मां प्रत्यंगिरा और श्री मलंगनाथ सरकार आपके जीवन के सारे संकटों को दूर कर, आपके लिए विजय और अपार सुख-शांति के द्वार खोल देंगे।
जय मां बगलामुखी! जय मां प्रत्यंगिरा! जय श्री मलंगनाथ सरकार! जय श्री महाकाल!
12. अमोदिया मां बगलामुखी धाम से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मां बगलामुखी धाम (अमोदिया) उज्जैन महाकाल मंदिर से कितनी दूर है?
उत्तर: अमोदिया स्थित मां बगलामुखी धाम श्री महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर (भैरवगढ़/मंगलनाथ मार्ग की ओर) स्थित है। आप ई-रिक्शा या ऑटो लेकर आसानी से 20 मिनट में यहाँ पहुँच सकते हैं।
प्रश्न 2: अमोदिया धाम में कौन-कौन से प्रमुख देवी-देवता विराजमान हैं?
उत्तर: इस सिद्ध परिसर में मां बगलामुखी के अलावा, काले जादू को नष्ट करने वाली मां प्रत्यंगिरा, एक अत्यंत दुर्लभ स्फटिक शिवलिंग, श्री महाबली काल भैरव, महावीर हनुमान, श्री खाटूश्याम बाबा, नवनाथ, नवदुर्गा और श्री मलंगनाथ सरकार की जाग्रत समाधि मौजूद है।
प्रश्न 3: यहाँ ‘मिर्ची हवन’ क्यों और कैसे किया जाता है?
उत्तर: मिर्ची हवन शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त करने, कोर्ट-कचहरी में विजय और ऊपरी बाधाओं (काले जादू) को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसमें सरसों के तेल में डूबी हुई साबुत लाल मिर्च की आहुति दी जाती है। सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि इस हवन के दौरान बिल्कुल भी धुआं या आंखों में जलन (तीखापन) महसूस नहीं होती।
प्रश्न 4: क्या अमोदिया बगलामुखी धाम और नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर एक ही हैं?
उत्तर: नहीं, दोनों अलग-अलग हैं। नलखेड़ा का मंदिर आगर-मालवा जिले में उज्जैन से लगभग 100 किमी दूर स्थित है। जबकि अमोदिया का बगलामुखी धाम उज्जैन शहर की सीमा के भीतर (भैरवगढ़ क्षेत्र) में स्थित है और यह एक अत्यंत जाग्रत तांत्रिक आश्रम और मंदिर है।
प्रश्न 5: धाम में अनुष्ठान कराने के लिए क्या पीले वस्त्र पहनना अनिवार्य है?
उत्तर: जी हाँ, माता बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ कहा जाता है। इसलिए धाम में किसी भी प्रकार का हवन या तांत्रिक अनुष्ठान करते समय साधक (भक्त) को पीले वस्त्र (पीली धोती/साड़ी/सूट) पहनना अनिवार्य होता है। सामान्य दर्शन के लिए आप कोई भी शालीन वस्त्र पहन सकते हैं।