Navgraha Temple Ujjain: नवग्रह मंदिर का इतिहास, दर्शन समय (Complete Guide)It takes 15 minutes... to read this article !

भारत की मोक्षदायिनी, पौराणिक और सांस्कृतिक राजधानी ‘उज्जैन’ (अवंतिका) को केवल मंदिरों का शहर नहीं, बल्कि ‘काल (समय) और ज्योतिष (Astrology)’ का मुख्य केंद्र माना जाता है। भगवान श्री महाकालेश्वर की इस पावन नगरी में समय की गणना और नवग्रहों (Nine Planets) की चाल का सीधा संबंध है। इसी ज्योतिषीय और खगोलीय महत्व का सबसे बड़ा साक्ष्य है—श्री नवग्रह मंदिर (Shri Navgraha Temple), जो उज्जैन के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट (Triveni Ghat) पर स्थित है।

सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का अत्यधिक महत्व है। मानव जीवन में होने वाले हर सुख-दुख, सफलता-असफलता और उत्थान-पतन के पीछे इन्हीं नवग्रहों की दशा और दिशा काम करती है। पूरे भारतवर्ष में ऐसे बहुत कम मंदिर हैं जो पूर्ण रूप से नवग्रहों को समर्पित हों, और उज्जैन का नवग्रह मंदिर उनमें से सबसे प्राचीन, जाग्रत और सिद्ध माना जाता है।

विशेषकर शनि की साढ़ेसाती (Sade Sati), ढैया और नवग्रह दोषों से पीड़ित श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है। वर्ष 2026 में, जब उज्जैन में धार्मिक पर्यटन अपने चरम पर है और श्रद्धालु बाबा महाकाल के साथ-साथ यहाँ के अन्य सिद्ध स्थानों के दर्शन कर रहे हैं, नवग्रह मंदिर की महत्ता और भी बढ़ गई है।

इस अत्यंत विस्तृत और संपूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) में हम नवग्रह मंदिर के प्राचीन इतिहास, त्रिवेणी संगम के महत्व, गर्भगृह में ग्रहों की वैज्ञानिक स्थापना, नवग्रह शांति पूजा के विधान, दर्शन व आरती के समय और आपकी उज्जैन यात्रा को सुगम बनाने वाली हर आवश्यक जानकारी पर गहराई से चर्चा करेंगे।

1. उज्जैन का खगोलीय महत्व और नवग्रह मंदिर की स्थापना (Astronomical Significance)

नवग्रह मंदिर की महत्ता को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि उज्जैन में ही नवग्रहों का इतना बड़ा केंद्र क्यों है?

पृथ्वी का नाभि केंद्र (Navel of the Earth)

प्राचीन भारतीय खगोलविदों (Astronomers) और महर्षि वराहमिहिर जैसे महान गणितज्ञों के अनुसार, उज्जैन नगरी की भौगोलिक स्थिति पूरी पृथ्वी के केंद्र में है।

  • कर्क रेखा (Tropic of Cancer): उज्जैन ठीक उसी अक्षांश पर स्थित है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है।

  • प्राइम मेरिडियन (Prime Meridian): प्राचीन काल में पूरी दुनिया के समय की गणना ग्रीनविच से नहीं, बल्कि उज्जैन से ही की जाती थी। इसे ‘ग्रीनविच ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है।

चूंकि उज्जैन समय और ग्रहों की गणना का केंद्र है, इसलिए यहाँ नवग्रहों की स्थापना का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रभाव पूरे ब्रह्मांड में सबसे सटीक और शक्तिशाली माना जाता है। त्रिवेणी घाट पर स्थित यह नवग्रह मंदिर उसी लौकिक ऊर्जा (Cosmic Energy) का केंद्र है जहाँ ग्रहों की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं।

2. श्री नवग्रह मंदिर का प्राचीन इतिहास (Historical Background)

नवग्रह मंदिर का इतिहास केवल कुछ सदियों पुराना नहीं है, बल्कि इसके तार प्राचीन भारतीय ज्योतिष शास्त्र के उदय और राजा विक्रमादित्य के कालखंड से जुड़े हुए हैं।

पौराणिक मान्यताएं

स्कंद पुराण और अवंतिका खंड में नवग्रहों की आराधना के लिए त्रिवेणी संगम (जहाँ यह मंदिर स्थित है) को सबसे पवित्र बताया गया है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में जब ग्रहों को उनके स्थान और कार्य सौंपे गए थे, तब त्रिवेणी घाट के इसी स्थान पर नवग्रहों ने भगवान शिव (महाकाल) की आराधना कर उनसे शक्ति और ऊर्जा प्राप्त की थी।

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मराठा काल का ऐतिहासिक जीर्णोद्धार (Maratha Architecture)

वर्तमान समय में जो भव्य नवग्रह मंदिर हम देखते हैं, उसकी वास्तुकला मराठा शैली (Maratha Architecture) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

  • 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, जब मालवा पर मराठों (सिंधिया और होलकर राजवंश) का आधिपत्य हुआ, तब उन्होंने उज्जैन के कई प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया।

  • उसी कालखंड में त्रिवेणी घाट पर इस नवग्रह मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर का शिखर, इसके पक्के घाट, और नवग्रहों की मूर्तियों की स्थापना बहुत ही व्यवस्थित और शास्त्रोक्त विधि से की गई।

  • पेशवाओं और सिंधिया शासकों के समय में यहाँ विशेष ज्योतिषीय अनुष्ठान और राजाओं की कुंडली के दोषों की शांति के यज्ञ किए जाते थे।

3. त्रिवेणी संगम घाट: तीन नदियों का पवित्र मिलन (Triveni Sangam Ghat)

नवग्रह मंदिर की भव्यता और ऊर्जा का एक बड़ा कारण इसके समीप स्थित ‘त्रिवेणी घाट’ है। यह घाट उज्जैन शहर से लगभग 5-6 किलोमीटर दूर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है।

इसे ‘त्रिवेणी संगम’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ तीन पवित्र नदियों का मिलन होता है:

  1. क्षिप्रा (Kshipra): उज्जैन की मुख्य और मोक्षदायिनी नदी।

  2. खान नदी (प्राचीन खिल्चीपुर नदी): जो अब खान नदी के नाम से जानी जाती है, वह आकर यहाँ क्षिप्रा में मिलती है।

  3. सरस्वती (Saraswati – अदृश्य रूप में): प्रयागराज की तरह ही, यहाँ भी माना जाता है कि ज्ञान और मोक्ष की नदी सरस्वती अदृश्य (गुप्त) रूप से इस संगम में बहती है।

त्रिवेणी स्नान का महत्व

शास्त्रों में त्रिवेणी संगम पर स्नान का महत्व कुंभ स्नान के बराबर बताया गया है। नवग्रह मंदिर में दर्शन करने से पूर्व श्रद्धालु इस त्रिवेणी घाट पर स्नान या जल का आचमन करते हैं। विशेष रूप से सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) और शनिश्चरी अमावस्या (Shani Amavasya) के दिन यहाँ स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और ग्रहों का दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है।

4. मंदिर की वास्तुकला और नवग्रहों की शास्त्रोक्त स्थापना (Idol Placement & Architecture)

नवग्रह मंदिर की संरचना और यहाँ मूर्तियों की स्थापना किसी साधारण मंदिर की तरह नहीं है। इसे पूर्णतः वैदिक ज्योतिष के ‘नवग्रह मंडल’ (Navgraha Mandal) के सिद्धांतों के आधार पर बनाया गया है।

गर्भगृह का स्वरूप (The Sanctum)

जैसे ही आप मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, आपको एक वृत्ताकार या चौकोर मंडल में नवग्रहों की अत्यंत आकर्षक मूर्तियां दिखाई देती हैं। इन मूर्तियों की स्थापना दिशाओं और ग्रहों के राजा के अनुसार की गई है:

  1. सूर्य देव (Sun): नवग्रहों के राजा भगवान सूर्य देव गर्भगृह के बिल्कुल मध्य (Center) में विराजमान हैं। वे रथ पर सवार हैं।

  2. चंद्र देव (Moon): सूर्य के निकट ही चंद्र देव की प्रतिमा है, जो शीतलता और मन की शांति का प्रतीक हैं।

  3. मंगल देव (Mars): साहस, ऊर्जा और रक्त के कारक मंगल देव की प्रतिमा लाल रंग के वस्त्रों में सुशोभित है। (हालांकि उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर मंगल की जन्मभूमि है, लेकिन यहाँ भी उनका स्वरूप नवग्रह मंडल में पूजनीय है)।

  4. बुध देव (Mercury): बुद्धि, व्यापार और वाणी के देवता।

  5. गुरु बृहस्पति (Jupiter): ज्ञान, विवाह और सौभाग्य के प्रदाता देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमा।

  6. शुक्र देव (Venus): धन, ऐश्वर्य, और दांपत्य सुख के कारक।

  7. शनि देव (Saturn): मंदिर में सबसे प्रमुखता से शनि देव की पूजा होती है। न्याय के देवता शनि महाराज की प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित है, जहाँ भक्त तेल और काले तिल चढ़ाते हैं।

  8. राहु (Rahu) और केतु (Ketu): छाया ग्रह राहु और केतु की मूर्तियां भी यहाँ स्थापित हैं, जिनकी विशेष शांति पूजा की जाती है।

शनि देव का विशेष महत्व

यद्यपि यह नवग्रह मंदिर है, लेकिन कलियुग में सबसे अधिक भय और कष्ट शनि की दशा (साढ़ेसाती और ढैया) से होता है। इसलिए इस मंदिर में शनिवार के दिन शनि देव की विशेष आराधना होती है। मंदिर के बाहर शनि देव को तेल अर्पित करने के लिए एक विशेष व्यवस्था (कुंड) भी बनाई गई है, ताकि मुख्य गर्भगृह में तेल के कारण असुविधा न हो।

5. नवग्रह शांति और अन्य प्रमुख अनुष्ठान (Major Rituals and Pujas)

नवग्रह मंदिर उज्जैन में आने वाले लाखों श्रद्धालु अपनी कुंडली के दोषों के निवारण के लिए यहाँ विभिन्न प्रकार के वैदिक अनुष्ठान करवाते हैं।

1. नवग्रह शांति पूजा (Navgraha Shanti Puja)

यदि किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार असफलता, बीमारी, आर्थिक तंगी या विवाह में बाधा आ रही हो, तो यह विभिन्न ग्रहों की बुरी दशा का संकेत है।

  • अनुष्ठान की विधि: मंदिर के वैदिक ब्राह्मणों द्वारा नवग्रह मंडल बनाकर, सभी नौ ग्रहों का आह्वान किया जाता है। नवग्रह समिधा (आक, पलाश, खदिर, अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, दूर्वा, और कुशा) से हवन किया जाता है।

  • फल: इस अनुष्ठान से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है और जीवन में शांति आती है।

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2. शनि साढ़ेसाती और ढैया शांति (Shani Sade Sati Puja)

जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है, वे यहाँ विशेष रूप से आते हैं।

  • शनिवार के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने के बाद, गीले वस्त्रों में ही शनि देव को सरसों का तेल, काले तिल, लोहे की कील, और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।

  • शनि चालीसा का पाठ और शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप यहाँ अत्यंत शीघ्र फल देता है।

3. राहु-केतु और कालसर्प दोष शांति

छाया ग्रह राहु-केतु के अशुभ प्रभावों और कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए भी यह मंदिर एक सिद्ध स्थान है। यहाँ त्रिवेणी घाट पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा विसर्जित करके राहु-केतु की शांति की जाती है।

4. वस्त्र और अनाज दान (Navgraha Daan)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए ग्रहों के रंग के अनुसार अनाज और वस्त्र दान किए जाते हैं। जैसे:

  • सूर्य के लिए गेहूं और लाल वस्त्र।

  • चंद्र के लिए चावल और सफेद वस्त्र।

  • गुरु के लिए चने की दाल और पीले वस्त्र।

  • शनि के लिए काली उड़द, सरसों का तेल और काले वस्त्र।

    (श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में ब्राह्मणों या गरीबों को इन वस्तुओं का दान करते हैं)।

6. नवग्रह मंदिर उज्जैन: दर्शन और आरती का समय (Timings & Schedule)

वर्ष 2026 में धार्मिक पर्यटन में वृद्धि के कारण मंदिर प्रशासन ने दर्शनार्थियों के लिए समय सारिणी को बहुत ही सुव्यवस्थित किया है। यदि आप अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो नीचे दी गई समय सारिणी (Table) का पालन करें:

मंदिर खुलने और बंद होने का समय

विवरण (Details) समय (Timings)
मंदिर खुलने का समय (प्रातः) सुबह 05:30 बजे
दोपहर का विश्राम (कपाट बंद) दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक
संध्या काल दर्शन प्रारंभ दोपहर 03:00 बजे से
मंदिर बंद होने का समय (रात्रि) रात 09:00 बजे

आरती की समय सारणी (Aarti Schedule)

आरती का नाम (Name of Aarti) समय (Time) महत्व (Significance)
मंगला आरती सुबह 06:00 बजे नवग्रहों का स्नान, श्रृंगार और प्रथम आरती।
मध्याह्न भोग आरती दोपहर 12:00 बजे नवग्रहों को नैवेद्य (भोग) अर्पित करना।
संध्या आरती (Evening Aarti) शाम 07:00 बजे (सूर्यास्त अनुसार) सबसे भव्य आरती, जिसमें शंख और घंटे बजाए जाते हैं।
शयन आरती रात 08:30 बजे ग्रहों के विश्राम से पूर्व की आरती।

(विशेष नोट: शनिवार और अमावस्या के दिन मंदिर में अत्यधिक भीड़ होती है। इन विशेष दिनों में मंदिर सुबह 4:00 बजे से ही भक्तों के लिए खोल दिया जाता है।)

7. मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख उत्सव और मेले (Major Festivals & Fairs)

नवग्रह मंदिर और त्रिवेणी घाट पर वर्ष भर कई बड़े धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं, जो इसे उज्जैन का एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बनाते हैं।

1. शनिश्चरी अमावस्या (Shani Amavasya)

जब भी अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, उसे ‘शनिश्चरी अमावस्या’ कहा जाता है। नवग्रह मंदिर के लिए यह साल का सबसे बड़ा दिन होता है।

  • इस दिन देश भर से लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर पहुंचते हैं।

  • प्रशासन द्वारा विशेष ‘शनि मेला’ (Shani Mela) आयोजित किया जाता है।

  • भक्त अपने पुराने वस्त्र और जूते त्रिवेणी घाट पर ही छोड़ जाते हैं (इसे शनि की पनौती छोड़ने का प्रतीक माना जाता है) और नए वस्त्र धारण कर नवग्रह मंदिर में दर्शन करते हैं।

2. सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya)

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या पर भी त्रिवेणी स्नान का भारी महत्व है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पीपल के वृक्ष (जो नवग्रह मंदिर के समीप है) की 108 परिक्रमा कर अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।

3. मकर संक्रांति (Makar Sankranti)

सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर नवग्रह मंदिर में भगवान सूर्य की विशेष आराधना की जाती है। त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान और तिल-गुड़ का दान किया जाता है।

4. सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियां (Upcoming Simhastha 2028)

वर्ष 2026 में, उज्जैन प्रशासन ने आगामी 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए त्रिवेणी घाट और नवग्रह मंदिर क्षेत्र का भारी विस्तार शुरू कर दिया है। घाटों का सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। कुंभ मेले के दौरान यहाँ शाही स्नान और पेशवाई का भव्य नजारा देखने को मिलता है।

8. उज्जैन: नवग्रह मंदिर कैसे पहुँचें? (How to Reach Navgraha Temple)

नवग्रह मंदिर उज्जैन शहर के मुख्य केंद्र से थोड़ा बाहरी इलाके में, इंदौर रोड पर त्रिवेणी घाट के समीप स्थित है। यह श्री महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है।

1. हवाई मार्ग (By Air)

उज्जैन का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय विमानतल’ (DABH) है। इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है। नवग्रह मंदिर उज्जैन-इंदौर हाईवे के करीब ही पड़ता है, इसलिए इंदौर से आते समय आप सबसे पहले नवग्रह मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

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2. रेल मार्ग (By Train)

उज्जैन जंक्शन (UJN) भारतीय रेलवे के मुख्य स्टेशनों में से एक है।

  • रेलवे स्टेशन से दूरी: उज्जैन रेलवे स्टेशन से नवग्रह मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है।

3. स्थानीय यातायात (Local Transport Guide 2026)

  • ई-रिक्शा और ऑटो (E-Rickshaw/Auto): उज्जैन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या महाकाल मंदिर से आप ई-रिक्शा या ऑटो रिजर्व करके (किराया लगभग ₹100-150) नवग्रह मंदिर पहुँच सकते हैं।

  • सिटी बस (City Bus): उज्जैन नगर निगम द्वारा संचालित सिटी बसें भी इंदौर रोड (त्रिवेणी घाट) की ओर जाती हैं।

  • पार्किंग सुविधा: मंदिर और घाट के पास चार-पहिया वाहनों (Cars, SUVs, Buses) की पार्किंग के लिए विशाल व्यवस्था है, जिससे निजी वाहन से आने वाले यात्रियों को कोई परेशानी नहीं होती।

9. श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण नियम और यात्रा टिप्स (Important Rules & Tips)

अपनी नवग्रह मंदिर की यात्रा को निर्विघ्न और सफल बनाने के लिए इन व्यावहारिक बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. ड्रेस कोड (Dress Code): नवग्रह मंदिर एक अत्यंत पवित्र वैदिक पीठ है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे मर्यादित और पारंपरिक भारतीय वस्त्र पहनकर ही दर्शन के लिए आएं। छोटे कपड़े (Shorts/Sleeveless) पहनकर मंदिर में प्रवेश न करें।

  2. शनिवार की भीड़: यदि आप केवल सामान्य दर्शन चाहते हैं, तो मंगलवार, बुधवार या गुरुवार को आएं। शनिवार और अमावस्या के दिन यहाँ लाखों की भीड़ होती है, जिसके लिए आपको घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ सकता है।

  3. स्वच्छता का ध्यान: त्रिवेणी संगम में स्नान करते समय साबुन या शैम्पू का प्रयोग न करें। पानी में प्लास्टिक की थैलियां या पुराने कपड़े (शनि अमावस्या को छोड़कर) न फेंकें। घाट को स्वच्छ रखना हमारी जिम्मेदारी है।

  4. दलालों से बचें: नवग्रह शांति या शनि दोष निवारण पूजा के लिए घाट पर या मंदिर के बाहर कई लोग आपको अनुष्ठान का लालच दे सकते हैं। किसी अनधिकृत व्यक्ति के झांसे में न आएं। मंदिर समिति द्वारा अधिकृत पुजारियों से ही उचित दक्षिणा पर अनुष्ठान संपन्न कराएं।

  5. तेल चढ़ाने के नियम: मंदिर के मुख्य गर्भगृह में तेल ले जाने की अनुमति नहीं होती है। बाहर बने विशेष शनि कुंड या पात्र में ही सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें।

10. नवग्रह मंदिर के आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)

अपनी नवग्रह मंदिर और त्रिवेणी घाट की यात्रा के दौरान, आप इसी मार्ग (इंदौर-उज्जैन रोड) और आस-पास स्थित इन प्रमुख तीर्थों के दर्शन भी कर सकते हैं:

  1. श्री चिंतामण गणेश मंदिर (Chintaman Ganesh): त्रिवेणी घाट से कुछ ही दूरी पर भगवान गणेश का यह अति प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित है, जहाँ त्रेता युग में भगवान राम ने स्थापना की थी।

  2. श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और महाकाल लोक: त्रिवेणी घाट से लगभग 5-6 किमी दूर, जहाँ भगवान शिव उज्जैन के राजा के रूप में विराजमान हैं।

  3. जंतर मंतर (Vedh Shala): यह एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला है जो नवग्रह मंदिर से शहर की ओर जाते समय रास्ते में पड़ती है। यहाँ से ग्रहों की चाल और समय की सटीक गणना आज भी की जाती है।

  4. हरसिद्धि माता मंदिर: 51 शक्तिपीठों में से एक (दूरी: लगभग 6 किमी)।

उज्जैन का श्री नवग्रह मंदिर (त्रिवेणी घाट) केवल मूर्तियों का समूह नहीं है, यह ब्रह्मांड की लौकिक ऊर्जा (Cosmic Energy), वैदिक ज्योतिष के विज्ञान और मनुष्य के कर्मफल सिद्धांत का एक जाग्रत केंद्र है। जब मानव जीवन ग्रहों की विपरीत चाल के कारण अंधकार, निराशा और संकटों से घिर जाता है, तब त्रिवेणी संगम पर स्थित यह नवग्रह मंदिर उसे आशा की नई किरण और समाधान प्रदान करता है।

चाहे आप शनि की साढ़ेसाती के भयंकर प्रकोप से गुजर रहे हों, गुरु के कमजोर होने से सफलता नहीं मिल रही हो, या राहु-केतु के कारण जीवन में अस्थिरता हो—नवग्रहों के इस दरबार में सच्चे मन से अर्पित किया गया एक दीपक और काले तिल आपके जीवन के सभी दोषों को भस्म करने की शक्ति रखते हैं। त्रिवेणी संगम का पवित्र जल केवल शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा और प्रारब्ध (Destiny) को भी शुद्ध कर देता है।

यदि आप वर्ष 2026 में महाकाल की नगरी उज्जैन आ रहे हैं, तो अपने यात्रा कार्यक्रम में ‘नवग्रह मंदिर’ को अवश्य शामिल करें। यहाँ आकर त्रिवेणी के पावन तट पर कुछ पल शांति के बिताएं और ग्रहों के राजा सूर्य देव से लेकर न्याय के देवता शनि महाराज तक सभी से अपने जीवन की सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: सर्वे ग्रहा: शान्तिकरा भवन्तु॥

(नवग्रह महाराज की जय! त्रिवेणी संगम की जय! श्री महाकाल बाबा की जय!)

11. नवग्रह मंदिर, उज्जैन से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: उज्जैन में नवग्रह मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: नवग्रह मंदिर उज्जैन शहर से लगभग 5-6 किलोमीटर दूर इंदौर-उज्जैन मार्ग पर पवित्र ‘त्रिवेणी घाट’ (क्षिप्रा नदी के तट) पर स्थित है।

प्रश्न 2: नवग्रह मंदिर में किस दिन दर्शन करना सबसे शुभ माना जाता है?

उत्तर: वैसे तो नवग्रह मंदिर में प्रतिदिन दर्शन किए जा सकते हैं, लेकिन ‘शनिवार’ (Saturday) और विशेषकर ‘शनिश्चरी अमावस्या’ के दिन यहाँ दर्शन, त्रिवेणी स्नान और शनि देव को तेल अर्पित करने का अत्यधिक और अनंत गुना महत्व माना गया है।

प्रश्न 3: त्रिवेणी संगम में किन तीन नदियों का मिलन होता है?

उत्तर: नवग्रह मंदिर के समीप स्थित त्रिवेणी घाट पर उज्जैन की मुख्य नदी ‘क्षिप्रा’ (Kshipra), ‘खान नदी’ (प्राचीन खिल्चीपुर) और अदृश्य रूप से बहने वाली ज्ञान की नदी ‘सरस्वती’ का पवित्र संगम होता है।

प्रश्न 4: नवग्रह मंदिर में शनि दोष निवारण के लिए क्या उपाय करें?

उत्तर: शनि की साढ़ेसाती या ढैया के दोष को दूर करने के लिए श्रद्धालु त्रिवेणी घाट पर स्नान करते हैं और फिर मंदिर के बाहर स्थित शनि कुंड में सरसों का तेल, काले तिल, लोहे की कील और काले वस्त्र अर्पित करते हैं। यहाँ शनि चालीसा का पाठ भी किया जाता है।

प्रश्न 5: क्या नवग्रह मंदिर में कालसर्प दोष की पूजा होती है?

उत्तर: जी हाँ, त्रिवेणी संगम होने के कारण यह स्थान राहु-केतु और कालसर्प दोष की शांति के लिए अत्यंत सिद्ध है। श्रद्धालु यहाँ नदी में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा विसर्जित करके विशेष वैदिक अनुष्ठान करवाते हैं।

Amit Tiwari (Ujjain)

"नमस्कार, मेरा नाम अमित तिवारी है और मैं ujjainmahakal.co.in का संस्थापक (Founder) तथा मुख्य लेखक हूँ। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव है। इस वेबसाइट की स्थापना के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य भगवान महाकालेश्वर की महिमा, उज्जैन के प्राचीन मंदिरों और यहाँ की सनातन संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी आप सभी भक्तों तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाना है। मेरी कोशिश रहती है कि महाकाल के हर भक्त को घर बैठे यहाँ की दिव्यता और सटीक जानकारी प्राप्त हो। जय श्री महाकाल!"

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